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NDPS केस में राहत: कलकत्ता हाईकोर्ट ने 196 दिन की हिरासत के बाद आरोपी को दी जमानत

कलकत्ता हाईकोर्ट ने NDPS मामले में आरोपी को जमानत दी, कहा—सीधे सबूत नहीं, सिर्फ कार चलाना अपराध से जोड़ने के लिए पर्याप्त नहीं। - Saw Herald बनाम State

Rajan Prajapati
NDPS केस में राहत: कलकत्ता हाईकोर्ट ने 196 दिन की हिरासत के बाद आरोपी को दी जमानत

पोर्ट ब्लेयर सर्किट बेंच में सुनवाई के दौरान कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक अहम आदेश देते हुए NDPS मामले में आरोपी को जमानत दे दी। अदालत ने पाया कि प्रथम दृष्टया आरोपी का सीधे तौर पर अपराध से जुड़ाव साबित नहीं होता।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला एक कथित ड्रग्स बरामदगी से जुड़ा है, जिसमें अभियोजन पक्ष का आरोप था कि आरोपी उस कार को चला रहा था, जिसमें से प्रतिबंधित पदार्थ बरामद हुआ। हालांकि, बचाव पक्ष ने दलील दी कि बरामदगी आरोपी के पास से नहीं बल्कि कार में बैठे एक अन्य व्यक्ति से हुई थी।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकीलों ने अदालत को बताया कि आरोपी पिछले 196 दिनों से हिरासत में है और उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। साथ ही, अब तक अभियोजन पक्ष के 29 गवाहों में से एक भी गवाह की गवाही नहीं हो सकी है।

न्यायमूर्ति सब्यसाची भट्टाचार्य ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद रिकॉर्ड का अवलोकन किया। अदालत ने जब्ती सूची (seizure list) पर गौर करते हुए कहा कि आरोपी के पास से केवल एक मोबाइल फोन बरामद हुआ था, न कि कोई प्रतिबंधित पदार्थ।

अदालत ने स्पष्ट किया,

“सिर्फ कार चलाने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि आरोपी का जब्त सामग्री पर नियंत्रण था, खासकर जब बरामदगी किसी अन्य व्यक्ति से हुई हो।”

साथ ही अदालत ने कहा कि NDPS अधिनियम की धारा 37 के तहत जमानत पर कड़े प्रावधान लागू होते हैं, लेकिन इसके लिए आरोपी का अपराध से प्रथम दृष्टया जुड़ाव दिखना जरूरी है।

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“रिकॉर्ड में ऐसा कोई ठोस सामग्री नहीं है जो आरोपी को सीधे तौर पर अपराध से जोड़ती हो,” अदालत ने जोड़ा।

राज्य की ओर से पेश लोक अभियोजक ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी कार चला रहा था, इसलिए यह माना जा सकता है कि वह जब्त सामग्री के “constructive possession” में था।

उन्होंने यह भी तर्क दिया कि कार आरोपी के पिता की थी, जिससे आरोपी की जानकारी और संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता।

अदालत ने इन दलीलों को परखते हुए कहा कि “possession” का अर्थ केवल भौतिक कब्जा नहीं होता, लेकिन इसके लिए यह दिखाना आवश्यक है कि आरोपी का किसी रूप में उस सामग्री पर नियंत्रण था।

अदालत ने पाया कि:

  • आरोपी के पास से कोई प्रतिबंधित पदार्थ नहीं मिला
  • केवल कार चलाना पर्याप्त नहीं है
  • अभियोजन अब तक कोई गवाह पेश नहीं कर सका
  • आरोपी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है

इन परिस्थितियों में अदालत ने माना कि आरोपी के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला कमजोर है।

इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने कहा,

“ऐसे पर्याप्त आधार हैं जिससे यह माना जा सकता है कि आरोपी प्रथम दृष्टया दोषी नहीं है और जमानत पर रहते हुए अपराध करने की संभावना भी नहीं है।”

अदालत ने CRM (NDPS) 5 of 2026 याचिका को स्वीकार करते हुए आरोपी को जमानत दे दी।

जमानत की शर्तें इस प्रकार हैं:

  • ₹10,000 का निजी मुचलका और दो जमानतदार
  • एक जमानतदार स्थानीय होना अनिवार्य
  • बिना अनुमति के नॉर्थ और मिडिल अंडमान जिले से बाहर नहीं जा सकता
  • हर पंद्रह दिन में संबंधित पुलिस स्टेशन में हाजिरी देनी होगी
  • गवाहों को प्रभावित करने या सबूत से छेड़छाड़ नहीं करेगा

Case Details

Case Title: Saw Herald vs The State

Case Number: CRM (NDPS) 5 of 2026

Judge: Justice Sabyasachi Bhattacharyya

Decision Date: April 24, 2026

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