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गुजरात हाईकोर्ट ने एयरपोर्ट अथॉरिटी के नोटिस रद्द किए, निर्माण हटाने के आदेश पर लगाई रोक

गुजरात हाईकोर्ट ने AAI के निर्माण हटाने संबंधी नोटिस रद्द कर दिए और पहले एरोनॉटिकल सर्वे कराने के बाद ही आगे की कार्रवाई का निर्देश दिया। - महिल इंफ्रा (साझेदारी फर्म) बनाम एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया और अन्य।

Rajan Prajapati
गुजरात हाईकोर्ट ने एयरपोर्ट अथॉरिटी के नोटिस रद्द किए, निर्माण हटाने के आदेश पर लगाई रोक

गुजरात उच्च न्यायालय ने एक अहम फैसले में एयरपोर्ट अथॉरिटीज द्वारा जारी किए गए नोटिसों को रद्द कर दिया है, जिसमें कथित तौर पर "अपार्टमेंट निर्माण" को हटाने के निर्देश दिए गए थे। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस केस में एरोनॉटिकल सर्वे (विमान सर्वे) के बिना कोई ऑर्डर टिक नहीं सकता।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला महिल इंफ्रा (एक ग्रेटर शिपमेंट फर्म) और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के बीच विवाद से जुड़ा था। एयरपोर्ट इन्वेस्टर्स ने निवेशकों के निर्माण को लेकर निवेशकों को आकर्षित किया था और उन्हें हटाने के लिए अधिसूचना जारी की थी।

कंपनी की ओर से बताया गया कि बिना वैज्ञानिक सर्वेक्षण और प्रक्रिया के निर्माण को

"आपत्तिजनक" के खिलाफ हटाने का आदेश दिया गया है। उन्होंने कोर्ट से राहत की मांग की थी।

मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति हेमंत एम. प्राच्छक की पीठ ने विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से विचार किया।

अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व फैसलों का भी हवाला दिया और कहा कि समान परिस्थितियों में पहले भी ऐसे मामलों में उचित तकनीकी अध्ययन (एरोनॉटिकल सर्वे) को जरूरी माना गया है।

पीठ ने स्पष्ट किया,

“बिना एरोनॉटिकल सर्वे के किसी निर्माण को हटाने का निर्देश देना उचित नहीं माना जा सकता। पहले वैज्ञानिक आधार पर मूल्यांकन होना आवश्यक है।”

अदालत ने यह भी कहा कि प्रशासनिक कार्रवाई संतुलित और प्रक्रिया के अनुरूप होनी चाहिए।

अदालत ने एयरपोर्ट अथॉरिटी द्वारा जारी नोटिसों को रद्द करते हुए कहा कि:

  • याचिकाकर्ताओं के खिलाफ जारी सभी नोटिस निरस्त किए जाते हैं।
  • संबंधित प्राधिकरण को निर्देश दिया जाता है कि पहले एरोनॉटिकल सर्वे/स्टडी कराई जाए।
  • सर्वे के आधार पर ही निर्माण की अधिकतम अनुमेय ऊंचाई तय की जाए।
  • यदि सर्वे के बाद कोई उल्लंघन पाया जाता है, तो कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

पीठ ने आगे निर्देश दिया कि यह सर्वे यथाशीघ्र कराया जाए और उसका खर्च याचिकाकर्ताओं द्वारा वहन किया जाएगा।

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अंत में अदालत ने कहा,

“सभी याचिकाएं स्वीकार की जाती हैं और नियम को उपरोक्त सीमा तक पूर्ण रूप से लागू किया जाता है।”

Case Details

Case Title: Mahil Infra (Partnership Firm) vs Airport Authority of India & Ors.

Case Number: R/Special Civil Application No. 3549 of 2024 (with connected matters)

Judge: Hon’ble Mr. Justice Hemant M. Prachchhak

Decision Date: 30 April 2026

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