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जन्म प्रमाणपत्र पर सवाल नहीं उठा सकते प्राधिकारी: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नवोदय विद्यालय को छात्र को प्रवेश देने का आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जन्म प्रमाणपत्र को बिना रद्द किए नकारा नहीं जा सकता और नवोदय विद्यालय को छात्र को प्रवेश देने का आदेश दिया। - विमल सिंह बनाम भारत संघ और अन्य

Shivam Y.
जन्म प्रमाणपत्र पर सवाल नहीं उठा सकते प्राधिकारी: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नवोदय विद्यालय को छात्र को प्रवेश देने का आदेश

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि कानून के तहत जारी जन्म प्रमाणपत्र को तब तक मान्य माना जाएगा, जब तक उसे रद्द न किया जाए या उसमें धोखाधड़ी साबित न हो जाए। अदालत ने नवोदय विद्यालय प्रशासन द्वारा एक छात्र को प्रवेश देने से इनकार करने को गलत ठहराया।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला कक्षा-6 में प्रवेश से जुड़ा था, जहां याचिकाकर्ता ने पीएम श्री स्कूल जवाहर नवोदय विद्यालय, बांदा में प्रवेश की मांग की थी।

याचिकाकर्ता ने ग्राम पंचायत द्वारा जारी जन्म प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया, जिसमें उसकी जन्मतिथि 01 जुलाई 2013 दर्ज थी। यह तिथि विद्यालय के प्रवेश नियमों के अनुरूप थी।

हालांकि, विद्यालय ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) की मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर छात्र की आयु अधिक बताते हुए प्रवेश देने से मना कर दिया।

न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकल पीठ ने कहा कि जन्म प्रमाणपत्र एक वैधानिक दस्तावेज है और इसे तब तक चुनौती नहीं दी जा सकती जब तक कि इसे विधिवत निरस्त न किया जाए या उसमें जालसाजी साबित न हो।

अदालत ने कहा,

“जब कोई दस्तावेज विधिक प्रावधान के तहत जारी हुआ है और उसकी वैधता को चुनौती नहीं दी गई है, तो प्राधिकारी उसे अपने स्तर पर संदेह के आधार पर खारिज नहीं कर सकते।”

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आयु निर्धारण के लिए किया जाने वाला ऑसिफिकेशन टेस्ट पूरी तरह सटीक नहीं होता और इसमें 2 वर्ष तक का अंतर संभव है। ऐसे में इसे निर्णायक आधार नहीं माना जा सकता।

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के कई निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि यदि जन्म प्रमाणपत्र उपलब्ध है, तो मेडिकल राय को प्राथमिकता नहीं दी जा सकती।

साथ ही, अदालत ने यह भी कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के तहत बच्चों को शिक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता, खासकर तब जब उनके पास वैध दस्तावेज मौजूद हों।

कोर्ट ने विद्यालय के निर्णय को कानून के विपरीत बताते हुए निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए कक्षा-6 में तुरंत प्रवेश दिया जाए।

इसके अलावा, अदालत ने निर्देश दिया कि नवोदय विद्यालयों में केवल तभी मेडिकल परीक्षण कराया जाए, जब जन्म प्रमाणपत्र या अन्य वैध दस्तावेज उपलब्ध न हों।

अंततः, याचिका का निस्तारण करते हुए अदालत ने संबंधित अधिकारियों को आदेश के अनुपालन के लिए निर्देशित किया।

Case Details

Case Title: Vimal Singh vs Union of India & Others

Case Number: Writ-C No. 14707 of 2025

Judge: Justice Siddharth Nandan

Decision Date: April 10, 2026

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