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डॉक्टर की ड्यूटी पर मौत के बाद पेंशन विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने बदला हाईकोर्ट का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने डॉक्टर की ड्यूटी के दौरान मौत मामले में हाईकोर्ट का एक्स्ट्राऑर्डिनरी पेंशन आदेश रद्द कर, नए सिरे से आवेदन और निर्णय की प्रक्रिया तय की। - उत्तराखंड राज्य बनाम सरिता सिंह और अन्य।

Vivek G.
डॉक्टर की ड्यूटी पर मौत के बाद पेंशन विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने बदला हाईकोर्ट का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य बनाम सरिता सिंह मामले में एक अहम निर्णय देते हुए कहा कि बिना उचित प्रक्रिया के एक्स्ट्राऑर्डिनरी पेंशन (विशेष पेंशन) देने का आदेश नहीं दिया जा सकता।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला डॉ. सुनील कुमार सिंह की मौत से जुड़ा है, जो उत्तराखंड में मेडिकल ऑफिसर के रूप में कार्यरत थे। 20 अप्रैल 2016 को ड्यूटी के दौरान उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई।

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उनकी पत्नी सरिता सिंह ने राज्य सरकार से मुआवजा और एक्स्ट्राऑर्डिनरी पेंशन की मांग की। राज्य ने कुछ राहत दी, जैसे ₹1 लाख एक्स-ग्रेशिया, बेटे को नौकरी और आवास, लेकिन पूरी मांग स्वीकार नहीं की।

इसके बाद उन्होंने उत्तराखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

हाईकोर्ट ने माना कि डॉक्टर की मृत्यु ड्यूटी के दौरान हुई थी, इसलिए परिवार को एक्स्ट्राऑर्डिनरी पेंशन मिलनी चाहिए।

कोर्ट ने करीब ₹1.99 करोड़ मुआवजा और पेंशन देने का आदेश दिया।

सुप्रीम कोर्ट में विवाद

राज्य सरकार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।

राज्य की ओर से कहा गया:

  • डॉक्टर का काम “जोखिम वाला कार्य” (risk duty) की श्रेणी में नहीं आता
  • एक्स्ट्राऑर्डिनरी पेंशन देने के लिए राज्यपाल की मंजूरी जरूरी है
  • निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया

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वहीं, याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि:

  • मृत्यु ड्यूटी के दौरान हुई
  • तकनीकी कारणों से लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एक्स्ट्राऑर्डिनरी पेंशन देने का अधिकार नियमों के तहत राज्यपाल के पास होता है।

कोर्ट ने कहा:

“जहां किसी प्राधिकरण को विवेकाधिकार दिया गया है, वहां न्यायालय को उसके स्थान पर निर्णय नहीं लेना चाहिए।”

साथ ही यह भी कहा गया कि हाईकोर्ट ने बिना राज्यपाल को निर्णय लेने का मौका दिए सीधे आदेश दे दिया, जो उचित नहीं था।

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सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को आंशिक रूप से संशोधित करते हुए:

  • एक्स्ट्राऑर्डिनरी पेंशन देने का आदेश रद्द कर दिया
  • याचिकाकर्ता को 4 सप्ताह में नया आवेदन देने की अनुमति दी
  • संबंधित प्राधिकरण को 12 सप्ताह में निर्णय लेने का निर्देश दिया
  • ₹1 करोड़ मुआवजा बरकरार रखा और कहा कि इसे वापस नहीं लिया जाएगा

Case Details

Case Title: State of Uttarakhand vs Sarita Singh & Ors.

Case Number: Civil Appeal (Arising out of SLP (C) Nos. 19840–19841 of 2021

Bench / Judges: Justice J.K. Maheshwari and Justice Atul S. Chandurkar

Decision Date: April 9, 2026

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