इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा कि प्रशासनिक कार्रवाई प्रेस की स्वतंत्रता को प्रभावित नहीं करनी चाहिए। अदालत ने संभल के जिलाधिकारी (DM) द्वारा एक समाचार पत्र को सरकारी विज्ञापन न देने के फैसले पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया।
मामले की पृष्ठभूमि
मामला M/s अमर उजाला लिमिटेड उत्तर प्रदेश राज्य से जुड़ा है, जिसमें याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि संभल प्रशासन ने उनके समाचार पत्र को सरकारी विज्ञापन देने से मना कर दिया।
याचिकाकर्ता का कहना था कि विवादित खबर के बाद उन्होंने 18 सितंबर 2025 को स्पष्टीकरण (corrigendum) प्रकाशित कर दिया था, फिर भी प्रशासन ने बिना जांच के कार्रवाई कर दी।
Read also:- क्लाइंट के निर्देश पर बोले वकील को नहीं ठहराया जा सकता दोषी: मद्रास हाईकोर्ट का अहम फैसला
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति विवेक सरन की खंडपीठ ने पाया कि अब विवाद “काफी हद तक मामूली” रह गया है, क्योंकि समाचार पत्र ने पहले ही सुधार प्रकाशित कर दिया था।
अदालत ने टिप्पणी की,
“ऐसा कोई आदेश, जो एकतरफा या दमनकारी प्रतीत हो, प्रेस की स्वतंत्रता (Fourth Estate की autonomy) पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।”
कोर्ट ने यह भी माना कि यदि प्रशासन को शिकायत थी, तो उसके लिए वैधानिक मंच उपलब्ध हैं, सीधे दंडात्मक कदम उठाना उचित नहीं है।
अंत में, हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि:
- याचिकाकर्ता दो सप्ताह के भीतर जिलाधिकारी के समक्ष नया आवेदन प्रस्तुत करे।
- जिलाधिकारी उस पर एक सप्ताह के भीतर निर्णय लें।
- निर्णय लेते समय समाचार पत्र द्वारा किए गए सुधार को ध्यान में रखा जाए और “व्यावहारिक दृष्टिकोण” अपनाया जाए।
इसी के साथ याचिका का निस्तारण कर दिया गया।
Case Details
Case Title: M/S Amar Ujala Limited vs State of U.P. and Another
Case Number: Writ-C No. 44086 of 2025
Judge: Justice Ajit Kumar, Justice Vivek Saran
Decision Date: March 25, 2026










