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क्लाइंट के निर्देश पर बोले वकील को नहीं ठहराया जा सकता दोषी: मद्रास हाईकोर्ट का अहम फैसला

मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि वकील को क्लाइंट के निर्देशों पर दिए गए बयानों के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, और उनके खिलाफ मानहानि केस रद्द किया। - जे.एन. नरेश कुमार बनाम जयकरण वासुदेवन और अन्य।

Vivek G.
क्लाइंट के निर्देश पर बोले वकील को नहीं ठहराया जा सकता दोषी: मद्रास हाईकोर्ट का अहम फैसला

मद्रास हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि किसी वकील को उसके मुवक्किल (क्लाइंट) के निर्देशों पर दिए गए बयानों के लिए आपराधिक रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने एक मानहानि मामले में वकील के खिलाफ कार्यवाही को रद्द कर दिया, जबकि अन्य आरोपियों के खिलाफ ट्रायल जारी रखने का आदेश दिया।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला C.C.No.376/2021 से जुड़ा है, जो तिरुवल्लूर के न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट में लंबित था। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि उनके खिलाफ झूठे यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए गए और इन्हें मीडिया के माध्यम से फैलाया गया।

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शिकायत के अनुसार, एक पारिवारिक विवाद के चलते पहले आरोपी के खिलाफ दीवानी मामला दायर किया गया था। इसके बाद कथित रूप से प्रतिशोध में एक POCSO शिकायत दर्ज कराई गई। हालांकि, जांच के बाद वह शिकायत खारिज कर दी गई।

इसके बाद, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि मीडिया प्लेटफॉर्म्स और अखबारों के माध्यम से उनके खिलाफ झूठी और मानहानिकारक खबरें फैलाई गईं।

सुनवाई के दौरान अदालत ने खासतौर पर तीसरे आरोपी, जो पेशे से एक वकील हैं, की भूमिका पर विचार किया।

न्यायमूर्ति ने कहा,

“एक वकील अपने मुवक्किल के निर्देशों के आधार पर ही कार्य करता है। उसे उन तथ्यों की सच्चाई या झूठ की स्वतंत्र जांच करने का अवसर नहीं होता।”

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अदालत ने आगे कहा,

“यदि वकीलों को उनके क्लाइंट के निर्देशों पर दिए गए बयानों के लिए अभियोजित किया जाने लगे, तो यह न्यायिक प्रणाली के स्थापित सिद्धांतों के विपरीत होगा।”

कोर्ट ने इस बात को भी “दुर्भाग्यपूर्ण” बताया कि केवल पेशेवर भूमिका निभाने के कारण वकील को आरोपी बनाया गया।

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अदालत ने पाया कि वकील के खिलाफ कोई ठोस और विशिष्ट आरोप नहीं हैं, सिवाय सामान्य आरोपों के कि उन्होंने अन्य आरोपियों की सहायता की।

इस आधार पर अदालत ने कहा कि वकील के खिलाफ चल रही कार्यवाही “कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग” है।

अदालत ने आदेश दिया कि:

  • तीसरे आरोपी (वकील) के खिलाफ कार्यवाही को रद्द किया जाता है।
  • पहले आरोपी के खिलाफ पर्याप्त आरोप मौजूद हैं, इसलिए उनके खिलाफ मुकदमा जारी रहेगा।
  • ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया गया कि वह तीन महीने के भीतर सुनवाई पूरी करे।

case details

Case Title: J.N. Naresh Kumar vs Jayakaran Vasudevan & Ors. (connected with Radhika Dolia vs Jayakaran Vasudevan)

Case Numbers: Crl.O.P. No. 8047 of 2022 & Crl.O.P. No. 20189 of 2023

Judge: G. K. Ilanthiraiyan

Court: Madras High Court

Decision Date: 02 March 2026

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