नई दिल्ली में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि NDPS कानून के तहत अलग-अलग धाराओं में दोषसिद्धि होने पर अलग-अलग सजा दी जा सकती है, लेकिन जुर्माना (fine) दो बार वसूला नहीं जा सकता।
यह फैसला हेम राज बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य मामले में आया, जिसमें अपीलकर्ता ने सजा के तरीके को चुनौती दी थी।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला 22 दिसंबर 2014 की सुबह का है, जब पुलिस टीम ने हिमाचल प्रदेश में नाका चेकिंग के दौरान एक कार को रोका। तलाशी के दौरान कार से करीब 4 किलो 100 ग्राम चरस बरामद हुई।
ट्रायल कोर्ट ने आरोपी हेम राज और सह-आरोपी को NDPS Act की धारा 20(b)(ii)(C), 25 और 29 के तहत दोषी ठहराते हुए 12-12 साल की सजा और जुर्माना लगाया।
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बाद में हाई कोर्ट ने सजा को घटाकर 10 साल कर दिया, लेकिन अन्य हिस्से बरकरार रखे।
अपीलकर्ता की ओर से यह दलील दी गई कि:
- एक ही घटना से जुड़े अपराधों के लिए अलग-अलग सजा देना “डबल पनिशमेंट” जैसा है
- धारा 25 और 29 के तहत अलग से सजा नहीं दी जानी चाहिए
- जब सजा साथ-साथ (concurrent) चल रही है, तो जुर्माना भी एक ही होना चाहिए
कोर्ट का अवलोकन
सुप्रीम कोर्ट ने विस्तृत सुनवाई के बाद कहा कि NDPS Act की धारा 25 (किसी स्थान या वाहन के उपयोग की अनुमति देना) और धारा 29 (षड्यंत्र/उकसाना) स्वतंत्र अपराध हैं।
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कोर्ट ने कहा:
“धारा 25 और 29 के अपराध अपने आप में स्वतंत्र हैं और इनके लिए अलग सजा दी जा सकती है।”
साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि:
“जब अलग-अलग अपराध एक ही घटना से जुड़े हों, तो सजा का साथ-साथ चलना (concurrent) उचित है ताकि दोहरी सजा से बचा जा सके।”
कोर्ट ने IPC की धारा 53 का हवाला देते हुए कहा कि जुर्माना भी सजा का हिस्सा है।
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इसलिए, यदि सजा साथ-साथ चल रही है, तो जुर्माना भी दो बार नहीं लिया जा सकता।
“जब सजा concurrent है, तो आरोपी से दो बार जुर्माना वसूलना उचित नहीं होगा।”
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि:
- अलग-अलग धाराओं के तहत अलग सजा देना वैध है
- लेकिन जुर्माना एक ही बार लिया जाएगा
- चूंकि अपीलकर्ता पहले ही 11 साल की सजा काट चुका है (जिसमें डिफॉल्ट सजा भी शामिल है), इसलिए उसे रिहा किया जाना चाहिए
Case Details
Case Title: Hem Raj vs The State of Himachal Pradesh
Case Number: Criminal Appeal (arising out of SLP (Crl.) No. 19691 of 2025)
Court: Supreme Court of India
Judge: Justice N. V. Anjaria & Prashant Kumar Mishra
Decision Date: 2026










