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हिरासत में मौत के आरोप पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त: जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी

दिल्ली हाईकोर्ट ने कथित हिरासत मौत मामले में निष्पक्ष जांच के लिए केस को स्थानीय थाने से हटाकर Crime Branch को सौंपने का आदेश दिया। - राहुल चौहान बनाम दिल्ली राज्य एवं अन्य

Vivek G.
हिरासत में मौत के आरोप पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त: जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी

दिल्ली हाईकोर्ट ने कथित पुलिस हिरासत में मौत के मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच को स्थानीय थाने से हटाकर Crime Branch को सौंप दिया है। अदालत ने कहा कि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना आवश्यक है, खासकर जब आरोप पुलिस अधिकारियों पर ही लगे हों।

मामले की पृष्ठभूमि

यह याचिका राहुल चौहान द्वारा दायर की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि 23 फरवरी 2026 को उन्हें और उनके पिता को संपत्ति विवाद के सिलसिले में थाना पुल प्रह्लादपुर, नई दिल्ली ले जाया गया।

याचिका के अनुसार, उनके पिता को पुलिस स्टेशन के भीतर एक अलग कमरे में ले जाकर कुछ पुलिसकर्मियों ने बुरी तरह पीटा। बाद में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

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याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि इस घटना को लेकर 2 मार्च 2026 को शिकायत दी गई थी, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

सुनवाई के दौरान अदालत ने सीसीटीवी फुटेज की उपलब्धता पर सवाल उठाए।

जब SHO से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि 23 फरवरी 2026 के आसपास पुलिस स्टेशन का CCTV सिस्टम काम नहीं कर रहा था। उन्होंने कहा कि “बंदरों के कारण मुख्य वायर क्षतिग्रस्त हो गया था,” और इस संबंध में डेली डायरी एंट्री भी दर्ज की गई थी।

हालांकि, SHO ने यह भी बताया कि कुछ वीडियो फुटेज पुलिस अधिकारियों द्वारा रिकॉर्ड किए गए हैं और कुछ फुटेज घटना से पहले घर के बाहर के भी उपलब्ध हैं।

अदालत ने इस स्थिति को गंभीर मानते हुए कहा कि मामले में निष्पक्षता बनाए रखना जरूरी है।

अदालत के सामने यह तथ्य आया कि जिस थाने के पुलिसकर्मियों पर आरोप लगे हैं, उसी थाने का अधिकारी मामले की जांच कर रहा है।

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इस पर अदालत ने स्पष्ट कहा कि

“ऐसी स्थिति में भविष्य में पक्षपात या संदेह की आशंका को दूर करना आवश्यक है।”

इन परिस्थितियों को देखते हुए, दिल्ली हाईकोर्ट ने FIR संख्या 44/2026 की जांच थाना पुल प्रह्लादपुर से हटाकर Crime Branch, दिल्ली को सौंप दी।

अदालत ने निर्देश दिया कि:

  • जांच एक ACP रैंक के अधिकारी द्वारा की जाए
  • जांच Joint Commissioner (Crime) की निगरानी में हो
  • केस फाइल सीलबंद लिफाफे में Crime Branch को सौंपी जाए
  • सभी साक्ष्य, जिसमें विसरा सैंपल भी शामिल हैं, नए जांच अधिकारी को दिए जाएं

अदालत ने यह भी कहा, “जांच पेशेवर और तेजी से आगे बढ़नी चाहिए।”

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मामले की अगली सुनवाई 5 मई 2026 को तय की गई है।

Case Details

Case Title: Rahul Chauhan vs State NCT of Delhi & Ors.

Case Number: W.P.(CRL) 997/2026

Judge: Justice Anup Jairam Bhambhani

Decision Date: March 27, 2026

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