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सेकेंडरी एविडेंस पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की स्पष्ट टिप्पणी, कहा - जब मूल दस्तावेज हो तो कॉपी स्वीकार नहीं

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया है कि भारतीय साक्षी अधिनियम, 2023 के तहत द्वितीयक साक्ष्य का उपयोग तब नहीं किया जा सकता जब मूल दस्तावेज मौजूद हो और उसे उचित कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से प्रस्तुत किया जा सके। - श्रीमती मुनेंद्र कुमार समाइया और अन्य बनाम श्रीमती वर्षा समाइया और अन्य

Shivam Y.
सेकेंडरी एविडेंस पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की स्पष्ट टिप्पणी, कहा - जब मूल दस्तावेज हो तो कॉपी स्वीकार नहीं

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में स्पष्ट किया है कि जब किसी मामले में मूल दस्तावेज मौजूद हो और उसे न्यायालय के रिकॉर्ड से प्राप्त किया जा सकता हो, तब सेकेंडरी एविडेंस के आधार पर दस्तावेज पेश करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

यह टिप्पणी अदालत ने एक सिविल विवाद से जुड़े मामले में दी, जिसमें ट्रायल कोर्ट ने एक दस्तावेज की प्रमाणित प्रति को सेकेंडरी एविडेंस के रूप में स्वीकार कर लिया था।

मामले की पृष्ठभूमि

मामला श्रीमती मुनेन्द्र कुमार समैया एवं अन्य बनाम श्रीमती वर्षा समैया एवं अन्य से संबंधित है। याचिकाकर्ताओं ने ट्रायल कोर्ट के 2 फरवरी 2026 के आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें अदालत ने
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 60 के तहत सेकेंडरी एविडेंस पेश करने की अनुमति दी थी।

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विवादित दस्तावेज ₹100 के स्टाम्प पेपर पर लिखा हुआ था, जिसमें कथित रूप से पक्षकारों के बीच धन लेनदेन की स्वीकारोक्ति दर्ज थी।

यह दस्तावेज पहले परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 (Negotiable Instruments Act) की धारा 138 से जुड़े एक आपराधिक मामले में दाखिल किया गया था। उस आपराधिक मामले के फैसले के खिलाफ अपील वर्तमान में हाईकोर्ट में लंबित है।

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि जब मूल दस्तावेज अदालत के रिकॉर्ड में मौजूद है, तब केवल प्रमाणित कॉपी के आधार पर सेकेंडरी एविडेंस की अनुमति देना कानून के अनुरूप नहीं है।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि प्रतिवादी कई बार उस दस्तावेज को सिविल मुकदमे में रिकॉर्ड पर लाने की कोशिश कर चुके थे।

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पहले उन्होंने Order 7 Rule 14 CPC के तहत आवेदन किया था, जिसे ट्रायल कोर्ट ने खारिज कर दिया था। इसके बाद उन्होंने आपराधिक मामले के रिकॉर्ड को बुलाने का भी प्रयास किया, लेकिन वह आवेदन भी स्वीकार नहीं किया गया।

बाद में प्रतिवादी ने दस्तावेज की प्रमाणित प्रति के आधार पर सेकेंडरी एविडेंस पेश करने का आवेदन दिया, जिसे ट्रायल कोर्ट ने मंजूरी दे दी थी।

मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति विवेक जैन ने कहा कि सेकेंडरी एविडेंस केवल अपवाद (exception) के रूप में स्वीकार की जाती है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि मूल दस्तावेज मौजूद है और उसे उचित प्रक्रिया के माध्यम से अदालत से प्राप्त किया जा सकता है, तो सेकेंडरी एविडेंस की अनुमति नहीं दी जा सकती।

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कोर्ट ने यह भी कहा कि दस्तावेज की प्रासंगिकता और उसकी प्रमाणिकता से जुड़े प्रश्न ट्रायल के दौरान तय किए जाएंगे, न कि प्रारंभिक चरण में।

हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को रद्द (set aside) कर दिया।

अदालत ने कहा कि जब तक हाईकोर्ट में लंबित आपराधिक अपील से मूल दस्तावेज प्राप्त करने की कोशिश नहीं की जाती, तब तक BSA, 2023 की धारा 60 का सहारा नहीं लिया जा सकता।

हालांकि अदालत ने प्रतिवादी को यह स्वतंत्रता दी कि वह उचित आवेदन देकर मूल दस्तावेज को रिकॉर्ड पर लाने का प्रयास कर सकते हैं।

Case Title: Smt Munendra Kumar Samaiya & Ors v. Smt Varsha Samaiya & Ors

Case Number: Misc. Petition No. 1514 of 2026

Decision Date: 13 March 2026

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