मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि शादी के शुरुआती दिनों में होने वाले सामान्य मतभेदों को “क्रूरता” नहीं माना जा सकता। अदालत ने पति की तलाक याचिका को खारिज करते हुए परिवार न्यायालय के आदेश को बरकरार रखा।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला राजा बनाम पार्वती से जुड़ा है, जिसमें पति ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13(1)(i-a) के तहत क्रूरता के आधार पर तलाक की मांग की थी।
पति का आरोप था कि पत्नी ने विवाह के कुछ महीनों बाद ही उसका घर छोड़ दिया, उसके माता-पिता का अपमान किया और वापस नहीं लौटी।
वहीं, पत्नी ने इन आरोपों को नकारते हुए कहा कि उसे ही प्रताड़ित किया गया और वह परिस्थितियों के कारण मायके जाने को मजबूर हुई। उसने अदालत में वैवाहिक अधिकारों की पुनर्स्थापना (Restitution of Conjugal Rights) की मांग भी की।
परिवार न्यायालय, ने पति की तलाक याचिका खारिज कर दी और पत्नी के पक्ष में निर्णय दिया। इसी आदेश को पति ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी।
सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने पहले यह सवाल उठाया कि क्या एक ही अपील में दो अलग-अलग राहतों तलाक याचिका की अस्वीकृति और पत्नी की याचिका की स्वीकृति को चुनौती दी जा सकती है।
पीठ ने कहा,
“काउंटर क्लेम एक स्वतंत्र याचिका के समान है, इसलिए इसके खिलाफ अलग से अपील दाखिल की जानी चाहिए।”
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हालांकि, अदालत ने मामले को केवल तलाक याचिका की अस्वीकृति तक सीमित रखते हुए आगे सुनवाई की।
अदालत ने पाया कि पति-पत्नी शादी के बाद बहुत कम समय तक साथ रहे और उनके बीच के मतभेद शुरुआती चरण के सामान्य विवाद थे।
पीठ ने कहा,
“पति-पत्नी के बीच शुरुआती झगड़े एक सामान्य घटना हैं। यदि इन्हें क्रूरता माना जाए, तो अधिकांश विवाह समाप्त हो जाएंगे।”
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पत्नी द्वारा लिखित जवाब में लगाए गए आरोपों को तलाक के लिए नया आधार नहीं बनाया जा सकता।
न्यायालय ने कहा कि पति क्रूरता साबित करने में असफल रहा। न तो शारीरिक और न ही मानसिक क्रूरता के पर्याप्त प्रमाण प्रस्तुत किए गए।
पीठ ने टिप्पणी की,
“एक स्थिर वैवाहिक संबंध समय, धैर्य और समायोजन की मांग करता है। केवल प्रारंभिक मतभेदों को क्रूरता नहीं कहा जा सकता।”
अदालत ने परिवार न्यायालय के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि तलाक देने का कोई आधार नहीं बनता।
निष्कर्षतः, सिविल मिक्स्ड अपील खारिज कर दी गई और कोई लागत नहीं लगाई गई।
Case Details
Case Title: Raja v. Parvathi
Case Number: CMA (MD) No. 899 of 2023
Court: Madurai Bench of Madras High Court
Judges: Justice N. Anand Venkatesh & Justice P. Dhanabal
Decision Date: 12 March 2026
Counsels:
- For Appellant: M/s A. Mohan
- For Respondent: Mr. S. Premkumar










