सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को बड़ा झटका देते हुए कहा कि रिलायंस इंडस्ट्रीज द्वारा आंध्र प्रदेश से उत्तर प्रदेश तक की गई प्राकृतिक गैस की आपूर्ति “इंटर-स्टेट सेल” है, इसलिए यूपी सरकार उस पर वैट नहीं लगा सकती।
न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार की सभी अपीलें खारिज कर दीं।
मामला रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड द्वारा KG-D6 बेसिन से निकाली गई प्राकृतिक गैस की बिक्री से जुड़ा था। गैस को आंध्र प्रदेश के गडीमोगा डिलीवरी पॉइंट से पाइपलाइन के जरिए गुजरात होते हुए उत्तर प्रदेश भेजा जाता था। यूपी सरकार का कहना था कि गैस की अंतिम डिलीवरी उत्तर प्रदेश में होती है, इसलिए यह राज्य के भीतर की बिक्री (Intra-State Sale) है और उस पर VAT लगाया जा सकता है।
हालांकि, रिलायंस ने दलील दी कि गैस की बिक्री पहले से हुए गैस सेल एंड परचेज एग्रीमेंट (GSPA) और गैस ट्रांसपोर्टेशन एग्रीमेंट (GTA) के तहत होती है। डिलीवरी पॉइंट गडीमोगा, आंध्र प्रदेश में तय था और वहीं से इंटर-स्टेट मूवमेंट शुरू हो जाता था। इसलिए यह केंद्रीय बिक्री कर (CST) कानून के तहत इंटर-स्टेट ट्रांजैक्शन है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि किसी बिक्री के कारण सामान एक राज्य से दूसरे राज्य में जाता है, तो वह CST Act की धारा 3 के तहत इंटर-स्टेट सेल मानी जाएगी। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पाइपलाइन में गैस का मिश्रित रूप में परिवहन होने या रास्ते में प्रोसेसिंग होने से बिक्री का स्वरूप नहीं बदलता।
पीठ ने कहा कि संविधान के तहत इंटर-स्टेट व्यापार पर कर लगाने का अधिकार केंद्रीय बिक्री कर व्यवस्था (CST framework) के तहत नियंत्रित है और राज्य सरकारें अपने VAT कानूनों के जरिए उस क्षेत्र में दखल नहीं दे सकतीं।
कोर्ट ने अंततः कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला सही था और उत्तर प्रदेश द्वारा लगाया गया VAT कानूनन टिकाऊ नहीं है।
Case Details
Case Title: State of Uttar Pradesh & Ors. v. Reliance Industries Limited & Ors.
Case Number: Civil Appeal No. 3910 of 2016 and connected matters
Court: Supreme Court of India
Judge: Justice J.K. Maheshwari
Date: May 15, 2026
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