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सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट का आदेश रद्द किया, 53 करोड़ रुपये विवाद में कंपनी का मुकदमा फिर बहाल

सुप्रीम कोर्ट ने MARG Limited का मुकदमा बहाल करते हुए कहा कि केवल प्रारंभिक चरण में plaint खारिज करना उचित नहीं था। - मेसर्स मार्ग लिमिटेड बनाम सुशील लालवानी और अन्य।

Rajan Prajapati
सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट का आदेश रद्द किया, 53 करोड़ रुपये विवाद में कंपनी का मुकदमा फिर बहाल

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें रियल एस्टेट कंपनी MARG Limited की दीवानी वाद (civil suit) याचिका शुरुआती चरण में ही खारिज कर दी गई थी। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद दावों को देखते हुए मामले में सुनवाई जरूरी है और इसे बिना ट्रायल खत्म नहीं किया जा सकता।

मामले की पृष्ठभूमि

कंपनी ने चेन्नई स्थित एक वाणिज्यिक संपत्ति खरीदी थी और बाद में बैंक से ऋण लिया। वित्तीय कठिनाइयों के कारण खाता NPA घोषित हुआ। बाद में बैंक से वन टाइम सेटलमेंट हुआ।

इसके बाद कंपनी और प्रतिवादियों के बीच संपत्ति सौदे को लेकर बातचीत हुई। कंपनी का कहना था कि एक व्यापक व्यावसायिक समझौता हुआ था, जिसके तहत बिक्री के अलावा अतिरिक्त भुगतान और अन्य दायित्व भी तय हुए थे। कंपनी ने आरोप लगाया कि लगभग ₹53 करोड़ की शेष राशि नहीं दी गई।

कंपनी ने 2024 में सिविल सूट दायर कर प्रतिवादियों को Memorandum of Agreement (MoA) लागू करने या संपत्ति पुनः हस्तांतरित करने की मांग की।

ट्रायल कोर्ट ने कहा कि plaint में सुनवाई योग्य विवाद है और उसे खारिज नहीं किया जा सकता। लेकिन मद्रास हाईकोर्ट ने यह कहते हुए plaint खारिज कर दी कि कोई वैध cause of action नहीं बनता और उचित court fee भी जमा नहीं की गई।

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि Order VII Rule 11 CPC के तहत plaint तभी खारिज की जा सकती है जब स्पष्ट रूप से कोई दावा न बनता हो। यदि plaint पढ़ने पर विवाद और अधिकार का प्रश्न सामने आता है, तो मामले की सुनवाई होनी चाहिए।

पीठ ने कहा,

“Plaint में ऐसे तथ्य बताए गए हैं जो एक जीवित विवाद (live dispute) दिखाते हैं, जिसे ट्रायल में परखा जाना चाहिए।”

अदालत ने यह भी कहा कि हाईकोर्ट ने प्रारंभिक चरण में ही दस्तावेजों की वैधता और समझौते की enforceability पर राय देकर “mini-trial” कर दिया, जो कानूनन उचित नहीं था।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि suit undervalued है या court fee कम जमा हुई है, तो पहले वादी को कमी दूर करने का अवसर देना चाहिए। सीधे plaint खारिज करना सही प्रक्रिया नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट का 28 जुलाई 2025 का आदेश रद्द कर दिया। ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया गया कि कंपनी को suit valuation सुधारने और आवश्यक court fee जमा करने का अवसर दिया जाए। इसके बाद मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी।

Case Details:

Case Title: M/s Marg Limited v. Sushil Lalwani & Ors.

Case Number: Civil Appeal arising out of SLP (C) No. 25132 of 2025

Court: Supreme Court of India

Judge: Justice Alok Aradhe; Justice Pamidighantam Sri Narasimha

Date: April 21, 2026

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