जम्मू और कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया कि यदि किसी अभ्यर्थी को प्रशासनिक त्रुटि के कारण नियुक्ति से वंचित किया जाता है, तो बाद में उसे न केवल नियुक्ति बल्कि वरिष्ठता और अन्य सभी लाभ भी उसी तिथि से दिए जाएंगे, जिस दिन उसके साथ चयनित अन्य उम्मीदवारों को नियुक्त किया गया था।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला राज्य (UT of J&K) बनाम रघु सिंह जांडला से जुड़ा है। याचिकाकर्ता सरकार ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उत्तरदाता रघु सिंह जंडला को जूनियर इंजीनियर (इलेक्ट्रिकल) पद पर 22 अगस्त 2009 से काल्पनिक (notional) नियुक्ति मानने का निर्देश दिया गया था।
रघु सिंह जंडला ने 2007-08 की भर्ती प्रक्रिया में आवेदन किया था और मेरिट में भी चयनित उम्मीदवारों से अधिक अंक प्राप्त किए थे। इसके बावजूद उन्हें आरबीए (RBA) श्रेणी प्रमाणपत्र के आधार पर समय सीमा के मुद्दे के कारण चयन से बाहर कर दिया गया।
बाद में अदालत ने पाया कि यह अस्वीकृति गलत थी और उन्हें 2014 में नियुक्ति दी गई। लेकिन उन्होंने अपनी नियुक्ति की तिथि 2009 से मानने की मांग की, जब अन्य चयनित उम्मीदवारों को नियुक्ति मिली थी।
खंडपीठ, जिसमें न्यायमूर्ति न्यायमूर्ति सिंधु शर्मा और न्यायमूर्ति न्यायमूर्ति शहजाद अजीम शामिल थे, ने कहा कि यह स्थापित कानून है कि:
“यदि किसी अभ्यर्थी को बिना उसकी गलती के नियुक्ति से वंचित किया गया है, तो उसे उसी चयन प्रक्रिया के अन्य उम्मीदवारों के साथ समान रूप से माना जाएगा।”
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अदालत ने यह भी कहा कि प्रशासन की गलती का खामियाजा अभ्यर्थी को नहीं भुगतना चाहिए।
“गलत तरीके से नियुक्ति से वंचित करने के बाद, यदि अदालत के आदेश से स्थिति सुधारी जाती है, तो उस अभ्यर्थी को वरिष्ठता और अन्य लाभ उसी आधार पर दिए जाएंगे, जिस आधार पर अन्य उम्मीदवारों को मिले।”
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि notional seniority एक न्यायसंगत अपवाद है, खासकर तब जब देरी नियुक्ति प्राधिकारी की गलती से हुई हो।
सरकार ने तर्क दिया कि:
- अभ्यर्थी ने नियुक्ति के समय कोई आपत्ति नहीं जताई, इसलिए बाद में दावा नहीं कर सकता
- वरिष्ठता केवल वास्तविक सेवा (actual service) से ही दी जा सकती है
- चूंकि वह 2014 में नियुक्त हुआ, इसलिए पुरानी पेंशन योजना का लाभ नहीं मिल सकता
कोर्ट ने इन सभी तर्कों को अस्वीकार कर दिया।
अदालत ने कहा कि:
- अभ्यर्थी को गलत तरीके से बाहर किया गया था
- वह मेरिट में अन्य चयनित उम्मीदवारों से बेहतर था
- इसलिए उसे 2009 से काल्पनिक नियुक्ति और उसी आधार पर वरिष्ठता मिलनी चाहिए
साथ ही, अदालत ने यह भी माना कि:
“जब नियुक्ति की तिथि 2009 मानी जाएगी, तो अभ्यर्थी पुरानी पेंशन योजना के तहत ही आएगा।”
कोर्ट ने पाया कि ट्रिब्यूनल के आदेश में कोई कानूनी त्रुटि नहीं है।
“इस मामले में ट्रिब्यूनल द्वारा पारित आदेश सही है और इसमें किसी प्रकार की कानूनी या तथ्यात्मक गलती नहीं पाई गई।”
इसके साथ ही, सरकार की याचिका खारिज कर दी गई।
Case Title:- Union Territory of Jammu & Kashmir & Ors. vs. Raghu Singh Jandla










