लंबे इंतजार और कई मुकदमों के बाद, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कानपुर विकास प्राधिकरण (KDA) को आदेश दिया है कि वह विवादित प्लॉट का कब्जा आवंटियों को सौंपे और उन्हें भारी हर्जाना भी अदा करे।
मामले की पृष्ठभूमि
मामला बी.एन. त्रिपाठी और अन्य बनाम राज्य उत्तर प्रदेश व अन्य से जुड़ा है। अपीलकर्ताओं ने दावा किया कि उन्हें 1984 में कानपुर के जाजमऊ क्षेत्र में एक प्लॉट 999 वर्षों की लीज पर मिला था, जिसके लिए पूरी राशि भी जमा कर दी गई थी।
इसके बावजूद, उन्हें कभी भी वास्तविक कब्जा नहीं दिया गया। उन्होंने लगातार पत्र लिखे, कानूनी नोटिस भेजे और यहां तक कि पहले भी मुकदमे दायर किए।
वादी पक्ष का कहना था कि प्लॉट पर फैक्ट्री लगाकर आजीविका चलाने की योजना थी, लेकिन कब्जा न मिलने से यह संभव नहीं हो सका और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि:
- लीज डीड में स्पष्ट रूप से उल्लेख था कि पूरी प्रीमियम राशि जमा की जा चुकी थी।
- KDA यह साबित नहीं कर सका कि प्लॉट का कब्जा कभी दिया गया था।
- न तो कोई दस्तावेजी साक्ष्य पेश किया गया और न ही कोई अधिकारी गवाही के लिए आया।
अदालत ने कहा,
“जब प्रतिवादी पक्ष स्वयं गवाही के लिए सामने नहीं आता, तो उसके खिलाफ प्रतिकूल अनुमान लगाया जा सकता है।”
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अदालत ने यह भी माना कि वादी लगातार वर्षों तक कब्जे की मांग करते रहे, जिससे यह साबित होता है कि कब्जा वास्तव में नहीं दिया गया था।
अदालत ने यह स्वीकार किया कि वादी प्लॉट का उपयोग व्यावसायिक उद्देश्य के लिए करना चाहते थे।
प्रोजेक्ट रिपोर्ट के आधार पर अदालत ने माना कि:
- वादी हर महीने लगभग ₹13,700 का लाभ कमा सकते थे
- कब्जा न मिलने से यह आय पूरी तरह रुक गई
इस आधार पर अदालत ने कहा कि वादी हर्जाने के हकदार हैं।
अदालत ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को “त्रुटिपूर्ण” बताते हुए रद्द कर दिया और अपील स्वीकार कर ली।
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अदालत ने आदेश दिया कि:
- KDA एक महीने के भीतर प्लॉट का वास्तविक कब्जा दे
- वादी को ₹13,700 प्रति माह की दर से 1 जुलाई 1987 से लेकर कब्जा मिलने तक हर्जाना दिया जाए
- इस राशि पर 6% वार्षिक ब्याज भी दिया जाए
- फैक्ट्री स्थापना लागत बढ़ने के लिए ₹5 लाख अतिरिक्त हर्जाना दिया जाए
- ₹2 लाख का अतिरिक्त प्रतिकर (exemplary costs) भी दिया जाए
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि स्वीकृत भवन योजना वादी को सौंप दी जाए ताकि वे निर्माण शुरू कर सकें।
Case Details
Case Title: B.N. Tripathi & Ors. vs. State of U.P. & Anr.
Case Number: First Appeal No. 10 of 2022
Judge: Justice Sandeep Jain
Decision Date: 09 April 2026










