राजस्थान हाईकोर्ट ने सिविल जज (प्रारंभिक) परीक्षा 2024 के परिणाम और उत्तर कुंजी को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने साफ कहा कि परीक्षा से जुड़े अकादमिक मामलों में विशेषज्ञ समिति के निर्णय में हस्तक्षेप केवल असाधारण परिस्थितियों में ही किया जा सकता है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला खुशबू चौधरी बनाम राजस्थान हाईकोर्ट से जुड़ा है, जिसमें याचिकाकर्ता ने सिविल जज भर्ती परीक्षा की अंतिम उत्तर कुंजी और परिणाम को चुनौती दी थी।
याचिकाकर्ता, जो खुद कोर्ट में पेश हुईं, ने दावा किया कि कई प्रश्नों के उत्तर गलत थे और उनकी आपत्तियों पर ठीक से विचार नहीं किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ प्रश्न हटाने से उन्हें नुकसान हुआ।
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परीक्षा 23 जून 2024 को हुई थी और 15 जुलाई 2024 को परिणाम जारी किया गया। याचिकाकर्ता कट-ऑफ से नीचे रहने के कारण चयनित नहीं हो सकीं।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने चार प्रश्नों पर विशेष आपत्ति जताई। वहीं, हाईकोर्ट की ओर से कहा गया कि सभी आपत्तियों की जांच के लिए विशेषज्ञ समिति बनाई गई थी, जिसने अंतिम उत्तर कुंजी तैयार की।
पीठ ने रिकॉर्ड का अवलोकन करते हुए कहा कि याचिका में कोई ठोस आधार नहीं है।
कोर्ट के प्रमुख अवलोकन
1. डिलीट किए गए प्रश्नों पर
कोर्ट ने माना कि जिन प्रश्नों को हटाया गया, वे सभी अभ्यर्थियों पर समान रूप से लागू हुए।
“सभी अभ्यर्थियों के साथ समान व्यवहार किया गया है, इसलिए इसे भेदभाव नहीं कहा जा सकता।”
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2. डबल जियोपार्डी (Double Jeopardy) से जुड़ा प्रश्न
कोर्ट ने कहा कि विशेषज्ञ समिति द्वारा चुना गया उत्तर सही था और याचिकाकर्ता की व्याख्या लागू नहीं होती।
3. ‘Ejusdem Generis’ बनाम ‘Homogenous Interpretation’
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दोनों का अर्थ समान है और केवल भाषा का अंतर है।
“दोनों अभिव्यक्तियाँ मूलतः एक ही विधिक सिद्धांत को दर्शाती हैं।”
4. कट-ऑफ का मुद्दा
कोर्ट ने कहा कि भले ही एक उत्तर याचिकाकर्ता के पक्ष में मान लिया जाए, तब भी वह कट-ऑफ (68) से नीचे ही रहतीं।
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कोर्ट ने दोहराया कि परीक्षा से जुड़े मामलों में विशेषज्ञ समिति का निर्णय प्राथमिक होता है।
“जहां दो संभावित व्याख्याएं हों, वहां विशेषज्ञ समिति का दृष्टिकोण ही मान्य होगा।”
कोर्ट ने यह भी कहा कि न्यायालय अपीलीय प्राधिकरण की तरह उत्तरों का पुनर्मूल्यांकन नहीं कर सकता।
सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद राजस्थान हाईकोर्ट ने याचिका को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया।
“हमें हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं मिलता। याचिका खारिज की जाती है।”
Case Title: Khushbu Choudhary vs Rajasthan High Court, Jodhpur
Case Number: D.B. Civil Writ Petition No. 12461/2024
Decision Date: 12 March 2026
Counsels:
- Petitioner: Khushbu Choudhary (in person)
- Respondent: Ms. Vaishnav Nikita, Mr. Chayan Bothra










