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नाबालिगों की आपत्तिजनक सामग्री का ऑनलाइन प्रसार गहरा और दीर्घकालिक प्रभाव डालता है: दिल्ली हाईकोर्ट ने जमानत देने से किया इनकार

दिल्ली उच्च न्यायालय ने नाबालिग के कथित यौन शोषण और आपत्तिजनक सामग्री के ऑनलाइन प्रसार से जुड़े एक मामले में गंभीरता और सहायक साक्ष्यों का हवाला देते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया। - सुमित बनाम दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी राज्य

Shivam Y.
नाबालिगों की आपत्तिजनक सामग्री का ऑनलाइन प्रसार गहरा और दीर्घकालिक प्रभाव डालता है: दिल्ली हाईकोर्ट ने जमानत देने से किया इनकार

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक ऐसे मामले में आरोपी को जमानत देने से इनकार कर दिया, जिसमें नाबालिग के साथ कथित यौन शोषण और आपत्तिजनक सामग्री को सोशल मीडिया पर फैलाने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला एफआईआर संख्या 179/2025 से जुड़ा है, जो ज्योति नगर थाना, दिल्ली में दर्ज हुई थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि आरोपी, जो उसके घर के पास रहता था, ने उसे नाबालिग अवस्था में बहलाकर उसके साथ दुष्कर्म किया और कई वर्षों तक उसका शोषण करता रहा।

शिकायत में यह भी कहा गया कि आरोपी ने आपत्तिजनक फोटो और वीडियो बनाकर उन्हें फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट्स के जरिए साझा किया और पीड़िता के परिचितों तक पहुंचाया।

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आरोपी को जून 2025 में गिरफ्तार किया गया था और वह तब से न्यायिक हिरासत में है।

आरोपी की ओर से कहा गया कि उसे झूठा फंसाया गया है और दोनों के बीच संबंध सहमति से थे। साथ ही, एफआईआर दर्ज करने में देरी और आपत्तिजनक सामग्री बरामद न होने का भी हवाला दिया गया।

वहीं, राज्य पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोप गंभीर हैं और पीड़िता के बयान तथा तकनीकी साक्ष्य आरोपी की भूमिका की ओर संकेत करते हैं।

अदालत ने कहा कि मामला केवल यौन शोषण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सोशल मीडिया के जरिए आपत्तिजनक सामग्री के प्रसार का भी गंभीर पहलू शामिल है।

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अदालत ने कहा,

“आरोपों में नाबालिग का यौन शोषण और आपत्तिजनक सामग्री का प्रसार शामिल है।”

कोर्ट ने यह भी पाया कि जांच में जुटाए गए साक्ष्य, जैसे गवाहों के बयान और तकनीकी रिकॉर्ड, प्रथम दृष्टया आरोपी की संलिप्तता दर्शाते हैं।

सह-आरोपी को जमानत मिलने के आधार पर समानता (parity) की दलील को भी कोर्ट ने खारिज कर दिया, यह कहते हुए कि दोनों की भूमिकाएं अलग-अलग हैं।

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अदालत ने यह भी कहा कि डिजिटल युग में इस तरह की सामग्री का प्रसार पीड़िता की गरिमा, निजता और भविष्य पर गंभीर और दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकता है।

मामले की गंभीरता, उपलब्ध साक्ष्यों और सुनवाई की वर्तमान स्थिति को देखते हुए अदालत ने माना कि इस चरण पर जमानत देना उचित नहीं है।

इसी के साथ, जमानत याचिका खारिज कर दी गई। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह टिप्पणियां केवल जमानत के निर्णय तक सीमित हैं और ट्रायल पर इसका प्रभाव नहीं पड़ेगा।

Case Details

Case Title: Sumit vs State of NCT of Delhi

Case Number: Bail Appln. 538/2026

Judge: Justice Swarana Kanta Sharma

Decision Date: 08 April 2026

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