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रिटायरमेंट के बाद भी सजा संभव: सुप्रीम कोर्ट ने बैंक अधिकारी की अपील खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि सेवानिवृत्ति से पहले शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्यवाही जारी रह सकती है, और ऋण अनियमितताओं के लिए एक बैंक अधिकारी पर लगाए गए दंड को बरकरार रखते हुए उसकी अपील खारिज कर दी है। - वीरेंद्र पाल सिंह बनाम पंजाब एंड सिंध बैंक और अन्य।

Shivam Y.
रिटायरमेंट के बाद भी सजा संभव: सुप्रीम कोर्ट ने बैंक अधिकारी की अपील खारिज की

नई दिल्ली से आज एक अहम फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि यदि विभागीय कार्यवाही सेवा के दौरान शुरू हुई हो, तो रिटायरमेंट के बाद भी उसे जारी रखते हुए सजा दी जा सकती है। कोर्ट ने पंजाब एंड सिंध बैंक के पूर्व अधिकारी की अपील खारिज कर दी।

मामले की पृष्ठभूमि

मामला विरिंदर पाल सिंह बनाम पंजाब एंड सिंध बैंक का है। अपीलकर्ता बैंक में कार्यरत थे, जिन पर 2011 में लोन वितरण में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए चार्जशीट दी गई। उसी दिन वे सेवानिवृत्त भी हो गए।

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विभागीय जांच जारी रही और एक आरोप लोन के उपयोग (end-use) की निगरानी न करना आंशिक रूप से साबित पाया गया। इसके आधार पर 2013 में उनकी सैलरी स्केल तीन स्तर नीचे कर दी गई, जिसका असर पेंशन पर पड़ा।

अपीलकर्ता ने इस कार्रवाई को पहले हाईकोर्ट में चुनौती दी, जहां सिंगल जज ने राहत दी, लेकिन डिवीजन बेंच ने बैंक के पक्ष में फैसला दिया। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बैंक अधिकारी सार्वजनिक धन से जुड़े होते हैं, इसलिए उनकी जिम्मेदारी अधिक होती है।

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पीठ ने कहा,

“लोन के उपयोग की निगरानी करना आवश्यक है, ताकि धन का दुरुपयोग न हो और बैंक का जोखिम कम रहे।”

कोर्ट ने पाया कि जांच अधिकारी की रिपोर्ट में पर्याप्त साक्ष्य थे खासकर बिना बिल के बड़ी नकद निकासी जिससे यह साबित हुआ कि अधिकारी ने लोन के सही उपयोग की पुष्टि नहीं की।

इसके अलावा, कोर्ट ने यह भी कहा कि:

“ऐसे मामलों में केवल यह तर्क पर्याप्त नहीं है कि बैंक को वास्तविक नुकसान नहीं हुआ।”

मुख्य सवाल यह था कि क्या रिटायरमेंट के बाद वेतन में कमी जैसी सजा दी जा सकती है?

कोर्ट ने बैंक के सर्विस रेगुलेशन्स का हवाला देते हुए कहा कि यदि विभागीय कार्यवाही रिटायरमेंट से पहले शुरू हो चुकी है, तो उसे ऐसे जारी रखा जा सकता है जैसे कर्मचारी अभी भी सेवा में हो।

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सुप्रीम कोर्ट ने माना कि:

  • विभागीय कार्यवाही वैध रूप से जारी रखी गई
  • आरोप आंशिक रूप से साबित थे
  • सजा अनुपातहीन (disproportionate) नहीं थी
  • वेतन में कमी का असर पेंशन पर लागू किया जा सकता है

अंत में कोर्ट ने कहा,

“डिवीजन बेंच का फैसला सही था… अपील में कोई मेरिट नहीं है।”

इसके साथ ही अपील खारिज कर दी गई।

Case Details

  • Case Title: Virinder Pal Singh vs Punjab and Sind Bank & Ors.
  • Case Number: Civil Appeal No. 3571 of 2026 (arising out of SLP (C) No. 10742/2026)
  • Judge: Justice Manoj Misra & Justice Pamidighantam Sri Narasimha
  • Decision Date: March 19, 2026

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