इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बाबलू यादव उर्फ बिल्ला को जमानत देते हुए मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस और अभियोजन तंत्र में समन्वय की कमी पर गंभीर टिप्पणी की।
मामले की पृष्ठभूमि
यह जमानत याचिका आगरा के एत्मद्दौला पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) के प्रावधानों के तहत दर्ज केस क्राइम नंबर 401/2025 के संबंध में दायर की गई थी।
याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि उसका नाम प्रारंभिक एफआईआर में नहीं था और बाद में उसे कुछ बरामदगी के आधार पर आरोपी बनाया गया। बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि उसके खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं है और वह 2 जनवरी 2026 से जेल में है।
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सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि जांच अधिकारी ने समय पर सरकारी अधिवक्ता को आवश्यक निर्देश नहीं भेजे, जबकि नोटिस प्राप्त हो चुका था।
बाद में दाखिल अनुपालन हलफनामे में बताया गया कि संबंधित जांच अधिकारी को लापरवाही के लिए निलंबित कर दिया गया है और उसके खिलाफ जांच शुरू की गई है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकारी अधिवक्ता कार्यालय में स्टाफ की कमी और फाइलों के डिजिटलीकरण में देरी जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं।
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अदालत ने टिप्पणी की,
“राज्य सरकार को स्टाफ की संख्या बढ़ानी चाहिए ताकि समय पर आवश्यक निर्देश प्राप्त हो सकें।”
साथ ही, कोर्ट ने सुझाव दिया कि तकनीकी जानकारी रखने वाले युवा वकीलों या नए विधि स्नातकों को रिसर्च एसोसिएट के रूप में जोड़ा जा सकता है।
बचाव पक्ष ने कहा कि आरोपी के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है और वह ट्रायल में पूरा सहयोग करेगा।
वहीं, राज्य की ओर से जमानत का विरोध किया गया, हालांकि बचाव पक्ष की कुछ प्रमुख बातों का खंडन नहीं किया गया।
सभी तथ्यों, साक्ष्यों और परिस्थितियों को देखते हुए, साथ ही जेलों में भीड़ और लंबित मामलों को ध्यान में रखते हुए, कोर्ट ने बिना मामले के गुण-दोष पर टिप्पणी किए जमानत देने को उचित माना।
अदालत ने आदेश दिया कि बाबलू यादव को व्यक्तिगत मुचलका और दो जमानतदार प्रस्तुत करने पर रिहा किया जाए।
जमानत की शर्तों में ट्रायल में सहयोग करना, साक्ष्यों से छेड़छाड़ न करना और किसी आपराधिक गतिविधि में शामिल न होना शामिल है।
Case Title: Babloo Yadav @ Billa vs State of U.P.
Case Number: Criminal Misc. Bail Application No. 6405 of 2026
Judge: Justice Arun Kumar Singh Deshwal
Decision Date: March 19, 2026










