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दिल्ली उच्च न्यायालय ने कोविड राहत केंद्र में तैनात स्कूल अधिकारी के परिजनों को 1 करोड़ रुपये की अनुग्रह राशि देने का आदेश दिया।

दिल्ली हाईकोर्ट ने कोविड ड्यूटी को “रूटीन” बताकर मुआवजा रोकने को गलत ठहराया और मृत शिक्षक के परिवार को ₹1 करोड़ देने का आदेश दिया। - प्रेम शीला कुमारी बनाम दिल्ली सरकार और अन्य।

Shivam Y.
दिल्ली उच्च न्यायालय ने कोविड राहत केंद्र में तैनात स्कूल अधिकारी के परिजनों को 1 करोड़ रुपये की अनुग्रह राशि देने का आदेश दिया।

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में साफ किया है कि कोविड-19 के दौरान की गई ड्यूटी को “रूटीन कार्य” कहकर कमतर नहीं आंका जा सकता। अदालत ने एक स्कूल के वाइस प्रिंसिपल की कोविड से हुई मौत के मामले में उनके परिवार को ₹1 करोड़ का मुआवजा देने का निर्देश दिया।

मामले की पृष्ठभूमि

यह याचिका श्रीमती प्रेम शीला कुमारी द्वारा दायर की गई थी, जिनके पति डॉ. राजा राम सिंह, एक सरकारी स्कूल में वाइस प्रिंसिपल थे। वे कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान राशन वितरण और हंगर रिलीफ सेंटर के संचालन में सक्रिय रूप से लगे हुए थे।

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रिकॉर्ड के अनुसार, वे 2 मई 2021 को कोविड संक्रमित हुए और 29 मई 2021 को अस्पताल में उनका निधन हो गया।

सरकार की “मुख्यमंत्री कोरोना सहायता योजना” के तहत ₹1 करोड़ के मुआवजे का प्रावधान था, लेकिन ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स (GoM) ने यह कहते हुए मुआवजा देने से इनकार कर दिया कि मृतक “कोविड ड्यूटी” पर नहीं बल्कि “रूटीन कार्य” कर रहे थे।

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति पुरुषेन्द्र कुमार कौरव ने इस तर्क को सख्ती से खारिज किया।

अदालत ने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान जो भी कर्मचारी सार्वजनिक सेवाएं बनाए रखने में लगे थे, उनकी भूमिका को सीमित दायरे में नहीं बांधा जा सकता।

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कोर्ट ने अपने पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए कहा:

“कोविड ड्यूटी और रूटीन ड्यूटी के बीच कृत्रिम अंतर बनाना कानून की नजर में मनमाना और अस्थिर है।”

अदालत ने यह भी माना कि मृतक को जिला प्रशासन द्वारा नामित केंद्र पर तैनात किया गया था और वे सक्रिय रूप से कोविड से संबंधित कार्य कर रहे थे।

कोर्ट ने पाया कि:

  • मृतक कोविड के दौरान सरकारी निर्देशों के तहत काम कर रहे थे
  • उनकी ड्यूटी में राशन वितरण और राहत कार्य शामिल था
  • वे ड्यूटी के दौरान ही संक्रमित हुए
  • GoM का “रूटीन ड्यूटी” वाला तर्क योजना के उद्देश्य के खिलाफ था

अदालत ने 3 नवंबर 2023 के GoM के आदेश को रद्द कर दिया।

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कोर्ट ने निर्देश दिया कि:

“याचिकाकर्ता ₹1 करोड़ के एक्स-ग्रेशिया मुआवजे की हकदार हैं।”

साथ ही, दिल्ली सरकार को छह सप्ताह के भीतर यह राशि देने का आदेश दिया गया।

Case Details

Case Title: Prem Sheela Kumari v. Govt. of NCT of Delhi & Anr.

Case Number: W.P.(C) 3310/2024

Judge: Justice Purushaindra Kumar Kaurav

Decision Date: 27 March 2026

Counsels:

  • For Petitioner: Mr. Prafulla, Ms. Divya, Mr. Ankur Rana, Mr. Kuldeep Singh
  • For Respondents: Ms. Vaishali Gupta, Mr. Kartik Sharma

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