मेन्यू
समाचार खोजें...
होमSaved

केरल उच्च न्यायालय ने दीपिका दैनिक संपादक को अदालत के आदेश की भ्रामक रिपोर्ट प्रकाशित करने के संबंध में स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया

केरल हाईकोर्ट ने एक भ्रामक खबर पर आपत्ति जताते हुए अख़बार के संपादक और याचिकाकर्ता से शपथपत्र मांगा, कहा ऐसा कोई आदेश पारित नहीं हुआ। - शाजी जे. कोडनकंडथ बनाम केरल राज्य एवं अन्य

Shivam Y.
केरल उच्च न्यायालय ने दीपिका दैनिक संपादक को अदालत के आदेश की भ्रामक रिपोर्ट प्रकाशित करने के संबंध में स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया

केरल हाईकोर्ट ने 19 मार्च 2026 को एक समाचार रिपोर्ट पर गंभीर चिंता जताई, जिसमें यह दावा किया गया था कि अदालत ने डिजिटल सर्वे उपकरणों की खरीद की जांच के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसा कोई आदेश पारित नहीं किया गया है और इस संबंध में दीपिका डेली के संपादक के संपादक और याचिकाकर्ता से स्पष्टीकरण मांगा है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला शाजी जे. कोडनकंडथ द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष यह जानकारी आई कि विधायक के. राजन ने हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को एक शिकायत पत्र भेजा है।

Read also:- शादीशुदा बेटी को नहीं मिला अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार, कर्नाटक हाईकोर्ट ने अपील खारिज की

इस शिकायत में याचिकाकर्ता द्वारा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कथित रूप से दिए गए बयान का उल्लेख किया गया, जिसे बाद में एक मलयालम दैनिक समाचार पत्र में प्रकाशित किया गया।

मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन और न्यायमूर्ति श्याम कुमार वी.एम. की खंडपीठ ने इस समाचार पर गंभीर आपत्ति जताई।

कोर्ट ने कहा कि खबर में यह दर्शाया गया है कि हाईकोर्ट ने डिजिटल सर्वे उपकरणों की खरीद की जांच के निर्देश दिए हैं, जबकि ऐसा कोई आदेश पारित नहीं किया गया।

“हम इस तथ्य को गंभीरता से लेते हैं, क्योंकि हमने ऐसा कोई आदेश पारित नहीं किया है,” पीठ ने स्पष्ट कहा।

Read also:- दशकों बाद किया सेवा दावा खारिज: हिमाचल हाई कोर्ट ने ट्रिब्यूनल का आदेश पलटा

मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने ‘दीपिका डेली’ के संपादक को नोटिस जारी किया और उन्हें निर्देश दिया कि वे समाचार के प्रकाशन को लेकर एक शपथपत्र (एफिडेविट) दाखिल करें।

साथ ही, याचिकाकर्ता को भी निर्देश दिया गया कि वह यह स्पष्ट करने के लिए शपथपत्र दाखिल करे कि क्या उसने प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐसा कोई बयान दिया था।

अदालत ने यह भी कहा कि अगली सुनवाई पर संपादक को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा और अपना पक्ष रखना होगा।

Read also:- IBC में ‘क्लीन स्लेट’ पूर्ण नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने आर्बिट्रेशन में Set-Off की सीमित अनुमति दी, काउंटरक्लेम पर रोक

कोर्ट ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड में प्रस्तुत अन्य दस्तावेजों से यह नहीं पता चलता कि अदालत के आदेश का गलत उद्धरण किया गया है। बल्कि, वे केवल यह दर्शाते हैं कि इस विषय में एक शिकायत सतर्कता (विजिलेंस) विभाग के समक्ष लंबित है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 26 मार्च 2026 तय की है। रजिस्ट्री को निर्देश दिया गया है कि वह तुरंत संपादक को नोटिस जारी करे। साथ ही, संपादक और याचिकाकर्ता दोनों को अगली सुनवाई से पहले अपने-अपने शपथपत्र दाखिल करने होंगे।

Case Title: Shaji J. Kodankandath v. State of Kerala & Ors.

Case Number: WP(PIL) No. 37 of 2026

Decision Date: March 19, 2026

More Stories