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दिल्ली हाई कोर्ट ने 1 साल की शर्त में दी राहत, 7 दिन में टूटी शादी के मामले में जल्द तलाक की अनुमति

दिल्ली हाई कोर्ट ने 7 दिन में अलग हुए दंपत्ति को राहत देते हुए एक साल की शर्त हटाकर आपसी सहमति से तलाक की अनुमति दी। - पारस जैन एवं अन्य. बनाम निमो

Shivam Y.
दिल्ली हाई कोर्ट ने 1 साल की शर्त में दी राहत, 7 दिन में टूटी शादी के मामले में जल्द तलाक की अनुमति

दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में शादी के एक साल पूरे होने की अनिवार्य शर्त को शिथिल करते हुए एक दंपत्ति को आपसी सहमति से तलाक की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में कानून का उद्देश्य समझौते का अवसर देना है, न कि पक्षकारों को अनावश्यक रूप से बांधे रखना।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला पारस जैन एवं अन्य. बनाम निमो से जुड़ा है। दोनों की शादी 7 मई 2025 को हुई थी, लेकिन वे केवल लगभग 7 दिन साथ रहे और 15 मई 2025 से अलग रहने लगे।

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रिकॉर्ड के अनुसार, यह विवाह कभी पूर्ण (consummate) नहीं हुआ और इस रिश्ते से कोई संतान भी नहीं है। बाद में, 19 सितंबर 2025 को दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से एक समझौता किया, जिसमें विवाह समाप्त करने पर सहमति बनी।

दंपत्ति ने फैमिली कोर्ट में एक साल की अनिवार्य अवधि को माफ करने की मांग की, लेकिन फैमिली कोर्ट ने यह कहते हुए आवेदन खारिज कर दिया कि एक साल की अवधि पूरी नहीं हुई है।

इसके बाद दंपत्ति ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस रेनू भटनागर की पीठ ने मामले की सुनवाई की और दोनों पक्षों से बातचीत भी की। अदालत ने निजी कारणों का उल्लेख करने से परहेज किया, लेकिन यह स्पष्ट किया कि परिस्थितियाँ असाधारण हैं।

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अदालत ने अपने आदेश में कहा:

“रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि पक्षकार केवल कुछ दिनों तक साथ रहे और वैवाहिक संबंध वास्तविक रूप से विकसित ही नहीं हो पाया।”

कोर्ट ने यह भी माना कि:

  • शादी सिर्फ औपचारिक रूप से अस्तित्व में है, व्यवहार में नहीं
  • दोनों पक्षों के बीच पुनर्मिलन की कोई संभावना नहीं है
  • एक साल का इंतजार कराने से कोई व्यावहारिक लाभ नहीं होगा

पीठ ने कहा कि कानून का उद्देश्य पक्षकारों को सोचने का समय देना है, लेकिन जब रिश्ता शुरू से ही असफल हो, तो इस शर्त पर जोर देना उचित नहीं।

अदालत ने स्पष्ट किया कि हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 14 में एक साल की अवधि का प्रावधान है, लेकिन इसमें अपवाद भी है - यदि मामला “असाधारण कठिनाई” (exceptional hardship) का हो, तो कोर्ट इस अवधि को माफ कर सकता है।

कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले अमरदीप सिंह बनाम हरवीन कौर और अपने ही फुल बेंच के निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि ऐसी परिस्थितियों में राहत दी जा सकती है।

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दिल्ली हाई कोर्ट ने:

  • फैमिली कोर्ट का 8 दिसंबर 2025 का आदेश रद्द कर दिया
  • एक साल की अनिवार्य अवधि को माफ कर दिया
  • दंपत्ति को तुरंत आपसी सहमति से तलाक की याचिका दाखिल करने की अनुमति दी
  • मामले को आगे की कार्यवाही के लिए फैमिली कोर्ट को वापस भेज दिया

अदालत ने निर्देश दिया कि आगे की प्रक्रिया को यथासंभव शीघ्र पूरा किया जाए।

Case Title: Paras Jain & Anr. vs Nemo

Case Number: MAT.APP.(F.C.) 72/2026

Decision Date: March 10, 2026

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