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ग्रैंड वेनिस घोटाले में सतिंदर सिंह भासिन पर सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई, जमानत रद्द; आत्मसमर्पण का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने ग्रैंड वेनिस केस में बेल शर्तों के उल्लंघन पर सख्त रुख अपनाया, निवेशकों के दावे लंबित और ₹50 करोड़ जमा पर भी सवाल उठाए। - सतिंदर सिंह भासिन बनाम दिल्ली सरकार और अन्य।

Shivam Y.
ग्रैंड वेनिस घोटाले में सतिंदर सिंह भासिन पर सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई, जमानत रद्द; आत्मसमर्पण का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने ‘ग्रैंड वेनिस’ प्रोजेक्ट से जुड़े मामले में दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए आरोपी सतींदर सिंह भसीन की जमानत शर्तों के पालन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत ने संकेत दिया कि जमानत केवल औपचारिक राहत नहीं, बल्कि जिम्मेदारी के साथ जुड़ी शर्तों का पालन भी जरूरी है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला ‘ग्रैंड वेनिस’ परियोजना से जुड़े कई खरीदारों की शिकायतों से जुड़ा है। आरोप है कि परियोजना में यूनिट्स का समय पर कब्जा नहीं दिया गया और निवेशकों के पैसे का सही उपयोग नहीं हुआ।

साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने भसीन को जमानत दी थी, इस शर्त के साथ कि वे खरीदारों के साथ समझौता करेंगे और 50 करोड़ रुपये जमा करेंगे।

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सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि जमानत का उद्देश्य केवल आरोपी को राहत देना नहीं था, बल्कि निवेशकों के दावों का समाधान सुनिश्चित करना भी था।

अदालत ने स्पष्ट कहा:

“जमानत का उद्देश्य निवेशकों के दावों का निपटारा सुनिश्चित करना था, लेकिन अब तक उस दिशा में ठोस प्रयास दिखाई नहीं देते।”

कोर्ट ने यह भी नोट किया कि कई वर्षों के बाद भी कई निवेशकों के दावे लंबित हैं।

सबसे गंभीर मुद्दा यह सामने आया कि जमानत की शर्त के तहत जमा किए गए 50 करोड़ रुपये आरोपी के व्यक्तिगत धन से नहीं, बल्कि उनकी कंपनी के फंड से आए थे।

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अदालत ने कहा:

“यह राशि व्यक्तिगत जिम्मेदारी के तहत जमा की जानी थी, लेकिन कंपनी के फंड का उपयोग किया गया, जो कानून के अनुरूप नहीं है।”

कोर्ट ने यह भी पाया कि इस लेन-देन के लिए आवश्यक कंपनी अनुमोदन (special resolution) नहीं लिया गया।

रिपोर्ट्स के अनुसार परियोजना अभी भी पूरी तरह तैयार नहीं है।

  • कई यूनिट्स अधूरी हैं
  • पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है
  • लिफ्ट और सुरक्षा व्यवस्था भी अधूरी पाई गई

इन परिस्थितियों में कोर्ट ने माना कि निवेशकों को वास्तविक राहत नहीं मिली है।

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कोर्ट ने यह भी देखा कि:

  • कई निवेशकों के साथ समझौते अधूरे हैं
  • जिन मामलों में समझौता हुआ, उनमें भी पालन नहीं हुआ

“सिर्फ समझौता करना पर्याप्त नहीं है, उसका पालन होना भी आवश्यक है,” अदालत ने कहा।

सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि जमानत की शर्तों का पालन न तो पूरी तरह हुआ है और न ही ईमानदारी से प्रयास किया गया है।

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अदालत ने आरोपी को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए पूछा कि:

  • उनकी जमानत क्यों न रद्द की जाए
  • जमा राशि का हिस्सा क्यों न जब्त किया जाए

मामले में आगे की कार्रवाई के लिए सुनवाई जारी रहेगी।

Case Details

Case Title: Satinder Singh Bhasin vs Government of NCT of Delhi & Ors.

Case Number: Miscellaneous Application No. 239 of 2024
in Writ Petition (Criminal) No. 242 of 2019

Court: Supreme Court of India

Judge: Justice Sanjay Karol

Decision Date: 26 February 2026

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