केरल हाईकोर्ट की पांच-न्यायाधीशों की पीठ ने एक अहम सवाल पर सुनवाई की क्या किसी व्यक्ति के पास केवल “छोटी मात्रा” (small quantity) में नशीला पदार्थ मिलने पर भी उसे केरल एंटी-सोशल एक्टिविटीज (KAAPA) के तहत “गुंडा” माना जा सकता है?
यह मामला पहले के विरोधाभासी फैसलों के कारण बड़ी पीठ के सामने आया था, जिससे कानून की सही व्याख्या को स्पष्ट करना जरूरी हो गया।
याचिकाकर्ता आलिया अशरफ ने अपनी हिरासत को चुनौती दी थी। मामला मुख्य रूप से NDPS Act और KAAPA के बीच संबंध को लेकर था।
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पहले के फैसलों में अलग-अलग राय सामने आई थी:
- कुछ निर्णयों में कहा गया कि केवल “possession” (कब्जा) भी पर्याप्त है।
- वहीं, बाद के फैसलों में माना गया कि केवल छोटी मात्रा रखने से व्यक्ति “drug offender” नहीं बनता।
इसी विरोधाभास के चलते मामला बड़ी पीठ को भेजा गया।
पीठ के सामने मुख्य प्रश्न था:
- क्या “छोटी मात्रा” में ड्रग्स रखने वाला व्यक्ति भी KAAPA के तहत “drug offender” और “goonda” माना जा सकता है?
- क्या “stocks” (भंडारण) शब्द में “possession” भी शामिल है?
सुनवाई के दौरान अदालत ने ड्रग्स के सामाजिक प्रभाव पर गंभीर चिंता जताई।
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अदालत ने कहा:
“ड्रग्स का उपयोग छोटी मात्रा में भी समाज, परिवार और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डालता है।”
पीठ ने यह भी माना कि बार-बार छोटी मात्रा में ड्रग्स रखने वाले व्यक्ति को हल्के में नहीं लिया जा सकता, क्योंकि यह “recidivism” (बार-बार अपराध) का संकेत हो सकता है।
एक महत्वपूर्ण अवलोकन में कहा गया:
“समाज में ड्रग्स के प्रति थोड़ी भी सहनशीलता विनाशकारी परिणाम ला सकती है।”
कोर्ट ने इस बात पर विस्तार से विचार किया कि KAAPA में “stocks” शब्द का क्या अर्थ है।
राज्य की ओर से दलील दी गई कि:
- “stocks” एक व्यापक शब्द है
- इसमें हर प्रकार का कब्जा (possession) शामिल हो सकता है—चाहे वह व्यक्तिगत उपयोग के लिए हो या व्यापार के लिए
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पीठ ने इस तर्क को गंभीरता से लिया और माना कि यह व्याख्या कानून के उद्देश्य के अनुरूप है।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि:
- हर अपराध “public order” को प्रभावित नहीं करता
- लेकिन ड्रग्स से जुड़ी गतिविधियाँ, खासकर बार-बार होने पर, समाज में भय और असुरक्षा पैदा कर सकती हैं
बड़ी पीठ ने यह स्पष्ट किया कि:
- केवल “छोटी मात्रा” का होना अपने आप में व्यक्ति को KAAPA से बाहर नहीं करता
- “stocks” शब्द का अर्थ व्यापक है और इसमें “possession” भी शामिल हो सकता है
- यदि परिस्थितियाँ दर्शाती हैं कि व्यक्ति की गतिविधियाँ समाज पर प्रभाव डाल रही हैं, तो उसे “goonda” घोषित किया जा सकता है
अदालत ने इस प्रकार पूर्व के फैसलों में व्यक्त संदेहों को संबोधित करते हुए कानून की व्यापक व्याख्या को स्वीकार किया और मामले का निस्तारण किया।
Case Details
Case Title: Aaliya Ashraf v. State of Kerala & Ors.
Case Number: ICR (WP(Crl.)) No. 20 of 2025 & WP(Crl.) No. 961 of 2024
Court: Kerala High Court
Judges: Justice Devan Ramachandran, Justice Gopinath P., Justice A. Badharudeen, Justice M.B. Snehalatha, Justice Jobin Sebastian
Decision Date: 31 March 2026










