पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि नाबालिग बच्चा अपने प्राकृतिक अभिभावक (पिता/माता) के पास रह रहा है, तो उसे अवैध हिरासत नहीं माना जा सकता। अदालत ने माँ द्वारा दायर हैबियस कॉर्पस याचिका को खारिज कर दिया।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला एक वैवाहिक विवाद से जुड़ा है, जिसमें याचिकाकर्ता माँ ने अपनी 9 वर्षीय बेटी की कस्टडी को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया।
रिकॉर्ड के अनुसार, दोनों पक्षों की शादी 2014 में हुई थी और बच्ची का जन्म 2016 में हुआ। 2024 में पति-पत्नी के बीच विवाद बढ़ गया, जिसके बाद माँ अलग रहने लगी, जबकि बच्ची पिता और दादा-दादी के साथ रहने लगी।
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माँ का आरोप था कि दिसंबर 2025 में पिता बिना बताए विदेश चले गए और बच्ची को एक तीसरे व्यक्ति के साथ रखा गया, जिससे उसकी सुरक्षा को लेकर चिंता उत्पन्न हुई।
माँ ने अदालत में कहा कि:
- बच्ची को उसकी जानकारी के बिना स्कूल बस स्टॉप से ले जाया गया
- उसे बच्ची से मिलने में बाधा डाली जा रही है
- बच्ची को किसी तीसरे व्यक्ति के पास रखना अवैध है
उन्होंने अदालत से बच्ची को प्रस्तुत करने और अंतरिम कस्टडी देने की मांग की।
राज्य की ओर से प्रस्तुत रिपोर्ट में कहा गया कि बच्ची अपने पिता के साथ रह रही है और उसका पता भी लगा लिया गया है।
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पिता की ओर से वकील ने दलील दी कि:
- पिता प्राकृतिक अभिभावक हैं
- बच्ची की कस्टडी वैध है
- माँ को बच्ची से संपर्क करने की अनुमति रही है
उन्होंने यह भी कहा कि यह याचिका वैवाहिक विवाद का विस्तार है और कानून का दुरुपयोग है।
न्यायमूर्ति सुमीत गोयल ने सुनवाई के दौरान कहा:
“हैबियस कॉर्पस याचिका तभी स्वीकार्य है जब हिरासत स्पष्ट रूप से अवैध हो।”
अदालत ने आगे स्पष्ट किया:
“जब बच्चा अपने प्राकृतिक अभिभावक के पास हो, तो सामान्यतः उसे अवैध हिरासत नहीं कहा जा सकता।”
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कोर्ट ने यह भी कहा कि इस मामले में कस्टडी से जुड़े तथ्य विवादित हैं और उनका निर्णय साक्ष्यों के आधार पर ही संभव है, जो कि फैमिली कोर्ट का क्षेत्राधिकार है।
सभी तथ्यों और दलीलों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने पाया कि:
- बच्ची अपने पिता के साथ रह रही है
- अवैध हिरासत का कोई प्रथम दृष्टया प्रमाण नहीं है
- मामला मुख्यतः कस्टडी विवाद का है
अदालत ने याचिका को अमान्य (not maintainable) मानते हुए खारिज कर दिया।
हालांकि, कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता को कानून के तहत उचित मंच (फैमिली कोर्ट आदि) पर जाने की स्वतंत्रता होगी।
Case Details
Case Title: Jyotsna Goel vs State of Haryana & Ors.
Case Number: CRWP-55-2026
Judge: Justice Sumeet Goel










