पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने लुधियाना में हुई एक बेहद संवेदनशील और गंभीर घटना में ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए दोषी सोनू सिंह की फांसी की सजा की पुष्टि कर दी। कोर्ट ने पूरे मामले की गहराई से समीक्षा करते हुए कहा कि उपलब्ध सबूत आरोपी की संलिप्तता की ओर स्पष्ट संकेत करते हैं।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला 28 दिसंबर 2023 का है, जब लगभग 4 साल की बच्ची, जिसे कोर्ट ने “लाडली” कहकर संबोधित किया, अपने नाना की चाय की दुकान के पास खेल रही थी।
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प्रोसिक्यूशन के अनुसार, सोनू सिंह ने बच्ची को बहाने से अपने साथ ले जाकर एक घर में ले गया, जहां उसके साथ दुष्कर्म किया गया और बाद में उसकी हत्या कर दी गई। उसी दिन बच्ची का शव एक बेड बॉक्स में छुपा हुआ मिला।
ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को POCSO एक्ट और IPC की धारा 302 के तहत दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई थी।
हाईकोर्ट ने कहा कि यह मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों (circumstantial evidence) पर आधारित है।
कोर्ट ने पाया कि बच्ची को आखिरी बार आरोपी के साथ देखा गया था और उसका शव उसी घर से बरामद हुआ जहां आरोपी ठहरा हुआ था।
कोर्ट ने कहा,
“रिकॉर्ड से यह स्पष्ट है कि आरोपी बच्ची को अपने साथ ले गया और उसके बाद वह जीवित नहीं देखी गई।”
फोरेंसिक रिपोर्ट में आरोपी का डीएनए बच्ची के शरीर से मिले सैंपल में पाया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह भी साबित हुआ कि बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न हुआ और फिर उसकी हत्या की गई।
यह वैज्ञानिक साक्ष्य मामले में बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ।
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कोर्ट ने सीसीटीवी फुटेज को भरोसेमंद नहीं माना।
कोर्ट ने कहा कि फुटेज अधूरी थी और सही तरीके से संरक्षित नहीं की गई थी, इसलिए उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
आरोपी द्वारा कथित रूप से दिए गए एक्स्ट्रा-ज्यूडिशियल कन्फेशन को भी कोर्ट ने खारिज कर दिया।
कोर्ट ने पाया कि यह बयान विश्वसनीय नहीं है और जांच के दौरान जोड़ा गया प्रतीत होता है।
मोबाइल लोकेशन से यह साबित हुआ कि आरोपी घटना के समय मौके के आसपास मौजूद था और बाद में वहां से भाग गया।
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कोर्ट ने स्पष्ट किया कि “लास्ट सीन” थ्योरी अकेले पर्याप्त नहीं होती, लेकिन जब इसे अन्य मजबूत साक्ष्यों के साथ देखा जाए, तो यह एक मजबूत कड़ी बनती है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में कुछ तथ्यों का स्पष्टीकरण आरोपी को देना होता है, जो उसने नहीं दिया।
सभी साक्ष्यों और परिस्थितियों का विश्लेषण करने के बाद हाईकोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि घटनाओं की श्रृंखला पूरी तरह से आरोपी की ओर ही इशारा करती है।
इस आधार पर कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई दोषसिद्धि और फांसी की सजा को बरकरार रखा।
Case Title: State of Punjab vs Sonu Singh
Case Number: MRC-2-2025 & CRA-D-658-2025
Judges: Justice Anoop Chitkara & Justice Sukhvinder Kaur
Decision Date: 19 March 2026










