नई दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन के खिलाफ दायर आपराधिक मानहानि शिकायत पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि चुनावी माहौल में दिए गए बयान को “राजनीतिक विरोध” के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि आपराधिक मानहानि के रूप में।
मामले की पृष्ठभूमि
यह शिकायत लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान मई 2024 में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में वित्त मंत्री द्वारा की गई टिप्पणियों से संबंधित है।
लिपिका मित्रा ने आरोप लगाया कि उनके और उनके पति के बीच हुए वैवाहिक विवादों से संबंधित बयान झूठे, दुर्भावनापूर्ण और उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से दिए गए थे। उन्होंने तर्क दिया कि टेलीविजन और सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित इन टिप्पणियों से उन्हें मानसिक पीड़ा हुई और उनके परिवार की सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचा।
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शिकायत भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के प्रावधानों के तहत दायर की गई थी, जिसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 356 के तहत आपराधिक मानहानि का आरोप लगाया गया था।
अदालत ने विस्तार से साक्ष्यों और गवाहों के बयान का विश्लेषण किया।
- कोर्ट ने पाया कि प्रेस कॉन्फ्रेंस मुख्य रूप से राजनीतिक संदर्भ में दी गई थी।
- बयान सीधे तौर पर शिकायतकर्ता के खिलाफ नहीं थे, बल्कि उनके पति के संदर्भ में राजनीतिक टिप्पणी थी।
- अदालत ने कहा कि आपराधिक मानहानि के लिए जरूरी तत्व - जैसे स्पष्ट आरोप (imputation), उसका प्रकाशन (publication), और नुकसान पहुंचाने की मंशा prima facie साबित नहीं होते।
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अदालत ने स्पष्ट कहा:
“यह बयान राजनीतिक विरोध और प्रतिस्पर्धा का हिस्सा हैं, न कि व्यक्तिगत रूप से शिकायतकर्ता के खिलाफ मानहानिकारक आरोप।”
इसके अलावा, अदालत ने यह भी नोट किया कि जिन आरोपों का उल्लेख किया गया, वे पहले से सार्वजनिक रिकॉर्ड और मीडिया रिपोर्ट्स में मौजूद थे।
कोर्ट ने भारतीय दंड कानून के तहत मानहानि के तीन आवश्यक तत्वों को दोहराया:
- किसी व्यक्ति के खिलाफ आरोप (imputation)
- उसका सार्वजनिक प्रसार (publication)
- नुकसान पहुंचाने की मंशा (intent)
अदालत ने कहा कि:
- शिकायतकर्ता के खिलाफ कोई सीधा आरोप नहीं लगाया गया
- बयान राजनीतिक भाषण के दायरे में आते हैं
- ऐसे मामलों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को उच्च स्तर का संरक्षण मिलता है
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि राजनीतिक भाषणों में मानहानि का आरोप लगाने के लिए उच्च मानदंड (higher threshold) जरूरी होता है।
अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि शिकायत में आपराधिक मानहानि का prima facie मामला नहीं बनता।
“रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से यह स्पष्ट है कि कोई अपराध स्थापित नहीं होता, इसलिए संज्ञान लेने से इनकार किया जाता है।”
इसके साथ ही मामला रिकॉर्ड रूम में भेज दिया गया।
Case Details
Case Title: Lipika Mitra v. Nirmala Sitharaman
Case Number: Complaint Case No. 13/2025
Judge: Paras Dalal (ACJM-01, Rouse Avenue Courts, Delhi)
Decision Date: 01 April 2026










