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दिव्यांग युवक की कथित हिरासत मौत मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उठाए ‘संस्थागत विफलता’ पर सवाल, गायब वीडियो रिकॉर्डिंग पर CBI जांच के आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2009 के नाहर सिंह हिरासत मौत मामले में वीडियो रिकॉर्डिंग गायब होने पर CBI को जांच के निर्देश दिए और पुलिस व NHRC की भूमिका पर सवाल उठाए। - एसोसिएशन फॉर एडवोकेसी एंड लीगल इनिशिएटिव्स, लखनऊ बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य

Shivam Y.
दिव्यांग युवक की कथित हिरासत मौत मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उठाए ‘संस्थागत विफलता’ पर सवाल, गायब वीडियो रिकॉर्डिंग पर CBI जांच के आदेश

मैनपुरी में 2009 में हुई दिव्यांग युवक नाहर सिंह की कथित हिरासत मौत मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस, राज्य प्रशासन और NHRC की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

मामले की पृष्ठभूमि

यह जनहित याचिका 2010 में “वकालत एवं कानूनी पहल संगठन” द्वारा दाखिल की गई थी। मामला मैनपुरी जिले के थाना दन्नाहार में 9 मई 2009 को हुई नाहर सिंह उर्फ स्नेह की मौत से जुड़ा है। याचिका के अनुसार, 40 प्रतिशत शारीरिक रूप से दिव्यांग नाहर सिंह पुलिस हिरासत में मृत पाए गए थे। पुलिस का दावा था कि उन्होंने लॉकअप के अंदर बेल्ट से फांसी लगाकर आत्महत्या की।

अदालत ने कहा कि पुलिस लॉकअप ऐसा स्थान नहीं होता जहां किसी गतिविधि पर नजर न रखी जा सके। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि 40 प्रतिशत दिव्यांग व्यक्ति द्वारा उस परिस्थिति में आत्महत्या करना प्रथम दृष्टया संदेह पैदा करता है।

न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि इस मामले में “संस्थागत विफलताएं” सामने आई हैं। अदालत ने टिप्पणी की, “16 वर्षों की देरी ने पुलिस और राज्य को सच्चाई छिपाने का अवसर दे दिया।”

कोर्ट ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट का भी उल्लेख किया, जिसमें गर्दन पर “knot mark” यानी रस्सी जैसी गांठ का निशान दर्ज था। अदालत ने कहा कि यदि मृतक ने बेल्ट से फांसी लगाई होती तो बेल्ट के बकल का निशान दिखाई देना चाहिए था। साथ ही ट्रेकियल रिंग्स में फ्रैक्चर पाए जाने को भी अदालत ने संदेहास्पद माना।

पीठ ने कहा,

“यह एक उचित संदेह उत्पन्न करता है कि कहीं मृतक का पहले गला घोंटा गया हो और बाद में उसे लॉकअप में लटका दिया गया हो।”

हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की जांच प्रक्रिया पर भी तीखी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि NHRC ने स्वतंत्र जांच करने के बजाय केवल पुलिस और SDM की रिपोर्ट पर भरोसा कर मामला बंद कर दिया।

कोर्ट ने कहा,

“यदि हिरासत मौत के मामले में NHRC सिर्फ पुलिस के बयान को ही अंतिम सत्य मान ले, तो उसके अस्तित्व पर ही सवाल खड़े होते हैं।”

वीडियोग्राफी और घटनास्थल की रिकॉर्डिंग लगातार पेश न किए जाने पर हाईकोर्ट ने CBI की एंटी करप्शन ब्रांच, गाजियाबाद को निर्देश दिया कि वह 60 दिनों के भीतर वीडियो रिकॉर्डिंग सुरक्षित कर अदालत के समक्ष पेश करे। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस चरण में FIR दर्ज करने की आवश्यकता नहीं है और CBI अदालत के आदेश के तहत कार्रवाई करेगी।

मामले की अगली सुनवाई 10 अगस्त 2026 को तय की गई है।

Case Details

Case Title: Association For Advocacy And Legal Initiatives, Lucknow vs State of U.P. & Others

Case Number: PIL No. 16563 of 2010

Judges: Justice Atul Sreedharan and Justice Siddharth Nandan

Decision Date: May 18, 2026

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