कटक स्थित ओडिशा हाईकोर्ट में हाल ही में एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने निष्पक्ष सुनवाई और विधिक प्रक्रिया के पालन को लेकर अहम टिप्पणियाँ कीं। अदालत कक्ष में हुई बहस के दौरान दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क रखे, जिसके बाद न्यायालय ने संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए आदेश पारित किया।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला एक याचिका के रूप में हाईकोर्ट के समक्ष लाया गया था, जिसमें याचिकाकर्ता ने निचली अथॉरिटी द्वारा पारित आदेश को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि संबंधित आदेश बिना पर्याप्त सुनवाई और तथ्यों के समुचित परीक्षण के पारित किया गया।
दूसरी ओर, प्रतिवादी पक्ष ने अदालत को बताया कि सभी आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन किया गया है और आदेश विधि के अनुरूप है।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलों को ध्यानपूर्वक सुना। न्यायाधीश ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि किसी भी प्रशासनिक या न्यायिक आदेश में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन आवश्यक है।
“पीठ ने कहा, ‘निष्पक्ष सुनवाई प्रत्येक व्यक्ति का अधिकार है और इसे किसी भी परिस्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।’”
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी आदेश को पारित करने से पहले संबंधित पक्षों को पर्याप्त अवसर देना जरूरी है, ताकि वे अपनी बात पूरी तरह रख सकें।
Read also:- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निलंबन आदेश रद्द किए, कहा-बिना ठोस आधार के कार्रवाई स्वीकार्य नहीं
रिकॉर्ड पर उपलब्ध दस्तावेजों और प्रस्तुत तथ्यों की समीक्षा करते हुए न्यायालय ने पाया कि मामले में कुछ प्रक्रियात्मक पहलुओं पर और स्पष्टता की आवश्यकता है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि केवल औपचारिकता पूरी करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि वास्तविक और प्रभावी सुनवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
“अदालत ने टिप्पणी की, ‘प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत केवल तकनीकी नियम नहीं हैं, बल्कि न्याय की नींव हैं।’”
सभी तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ओडिशा हाईकोर्ट ने संबंधित आदेश को निरस्त/संशोधित करने का निर्देश दिया (जैसा लागू हो)। साथ ही मामले को पुनः विचार के लिए सक्षम प्राधिकरण के पास भेजने का आदेश दिया गया, ताकि उचित प्रक्रिया का पालन करते हुए नया निर्णय लिया जा सके।
Case details
Case Title:Srujeet Khuntia vs State of Odisha & Others
Case Number: W.P.(C) PIL No. 6181 of 2026
Bench/Judges: Chief Justice Harish Tandon and Justice Murahari Sri Raman
Decision Date: 15 April 2026











