पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने शुक्रवार को उस जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया जिसमें पंजाब सरकार द्वारा विभिन्न विकास प्राधिकरणों से ₹2500 करोड़ लेकर GMADA को ऋण देने के फैसले को चुनौती दी गई थी। अदालत ने कहा कि पंजाब रीजनल एंड टाउन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट एक्ट, 1995 के तहत यह कदम कानून के दायरे में आता है।
मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति संजीव बेरी की खंडपीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई आधार नहीं है जिससे यह माना जाए कि सरकार ने अपने अधिकारों का उल्लंघन किया है।
मामले की पृष्ठभूमि
याचिका “सार्वजनिक कार्य समिति” और उसके सदस्यों द्वारा दायर की गई थी। इसमें 1 अप्रैल 2026 के उस सरकारी पत्र को रद्द करने की मांग की गई थी जिसके जरिए PUDA, GLADA, ADA, BDA, JDA और PDA जैसे विकास प्राधिकरणों को GMADA को कुल ₹2500 करोड़ ऋण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे।
याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि पंजाब सरकार ने बिना वैधानिक अधिकार के यह आदेश जारी किया और यह पंजाब रीजनल एंड टाउन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट एक्ट, 1995 के विपरीत है।
राज्य सरकार की ओर से प्रारंभिक आपत्ति भी उठाई गई कि याचिका दायर करने वाली समिति पंजीकृत संस्था नहीं है, इसलिए PIL सुनवाई योग्य नहीं है। हालांकि अदालत ने यह आपत्ति खारिज कर दी क्योंकि छह व्यक्तिगत याचिकाकर्ता भी मामले में शामिल थे।
सुनवाई के दौरान अदालत ने एक्ट की धारा 28, 40, 49 और 51 का विस्तार से उल्लेख किया। कोर्ट ने कहा कि इन प्रावधानों से स्पष्ट है कि विकास प्राधिकरणों को विभिन्न स्रोतों से धन उधार लेने और वित्तीय व्यवस्थाएं करने का अधिकार प्राप्त है।
खंडपीठ ने कहा,
“धारा 49 और 51 को साथ पढ़ने पर यह स्पष्ट होता है कि अथॉरिटी को राज्य सरकार के अलावा अन्य स्रोतों से भी धन उधार लेने की शक्ति प्राप्त है।”
अदालत ने यह भी कहा कि “such other sources” शब्दों का दायरा व्यापक है और वैध स्रोतों से वित्तीय संसाधन जुटाए जा सकते हैं।
हाईकोर्ट ने माना कि 1 अप्रैल 2026 का विवादित पत्र केवल पंजाब सरकार की स्वीकृति थी, जिसके माध्यम से अथॉरिटी को विभिन्न स्रोतों से ₹2500 करोड़ उधार लेने की अनुमति दी गई।
पीठ ने कहा कि एक्ट की धारा 49 और 51 का कोई उल्लंघन प्रथम दृष्टया दिखाई नहीं देता, बशर्ते संबंधित वित्तीय शर्तों और वैधानिक प्रावधानों का पालन किया जाए।
इन टिप्पणियों के साथ अदालत ने जनहित याचिका खारिज कर दी।
Case Details
Case Title: Public Action Committee and Others vs State of Punjab and Others
Case Number: CWP-PIL-92-2026
Judges: Justice Sheel Nagu and Justice Sanjiv Berry
Decision Date: May 7, 2026











