सिक्किम हाईकोर्ट ने मोटर दुर्घटना मुआवजे के एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा संशोधन करते हुए बीमा कंपनी को राहत दी है। अदालत ने पाया कि दावा किए गए 50% स्थायी विकलांगता के समर्थन में पर्याप्त चिकित्सा साक्ष्य नहीं थे।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला सिक्किम हाईकोर्ट में शाखा प्रबंधक, न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड बनाम ज्ञानदुप शेरिंग लेपचा और अन्य से जुड़ा है।
मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT), गंगटोक ने पहले ₹29,12,887 का मुआवजा 6% वार्षिक ब्याज के साथ प्रदान किया था। अधिकरण ने यह मानते हुए मुआवजा तय किया कि घायल व्यक्ति को लगभग 50% स्थायी विकलांगता हुई है।
बीमा कंपनी ने इस आदेश को चुनौती देते हुए कहा कि विकलांगता का कोई प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं किया गया था और मुआवजा अनुमान के आधार पर तय किया गया।
सुनवाई के दौरान एकल पीठ की न्यायमूर्ति मीनाक्षी मदन राय ने रिकॉर्ड पर मौजूद चिकित्सा दस्तावेजों का विस्तार से परीक्षण किया।
अदालत ने कहा कि डिस्चार्ज समरी में यह कहीं नहीं दर्शाया गया कि घायल व्यक्ति स्थायी रूप से विकलांग हुआ है।
न्यायालय ने स्पष्ट रूप से टिप्पणी की,
“रिकॉर्ड में ऐसा कोई प्रमाण नहीं है जो यह दर्शाए कि दुर्घटना के कारण स्थायी विकलांगता हुई हो।”
कोर्ट ने यह भी कहा कि पसली (rib) के फ्रैक्चर को अपने आप में स्थायी विकलांगता मानना “असंभव” प्रतीत होता है।
इसके अलावा, गवाह के बयान पर भी अदालत ने सवाल उठाए और उसे “स्वयं-विरोधी और अविश्वसनीय” बताया।
अदालत ने पाया कि:
- कोई वैध विकलांगता प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं किया गया
- मेडिकल विशेषज्ञ या दस्तावेजों में स्थायी अक्षमता का उल्लेख नहीं था
- अधिकरण ने अनुमान (surmise) के आधार पर 50% विकलांगता मान ली
न्यायालय ने कहा,
“केवल चोटों के आधार पर विकलांगता का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है, जब तक उसे चिकित्सा साक्ष्य से समर्थन न मिले।”
इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने MACT के आदेश को त्रुटिपूर्ण मानते हुए निरस्त कर दिया।
हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि:
- घायल व्यक्ति केवल ₹1,14,147 का मुआवजा पाने का हकदार है, जो वास्तविक चिकित्सा खर्च के आधार पर है
- इस राशि पर 9% वार्षिक ब्याज दिया जाएगा (दावा दायर करने की तारीख से)
- यदि भुगतान में देरी होती है, तो 12% ब्याज लागू होगा
अदालत ने बीमा कंपनी को एक महीने के भीतर भुगतान करने का निर्देश दिया और अपील का निस्तारण कर दिया।
Case Details:
Case Title: The Branch Manager, New India Assurance Co. Ltd. vs. Gyandup Tshering Lepcha & Others
Case Number: MAC App. No. 16 of 2025
Judge: Justice Meenakshi Madan Rai
Decision Date: 16 April 2026










