बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने Z+ सुरक्षा को लेकर दायर जनहित याचिका (PIL) को खारिज करते हुए कहा कि इसमें कोई वास्तविक सार्वजनिक हित नहीं है और यह न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है।
मामले की पृष्ठभूमि
याचिकाकर्ता लालन किशोर सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उसके सरसंघचालक मोहन भागवत को दी गई Z+ सुरक्षा पर सवाल उठाया था। याचिका में मांग की गई थी कि सुरक्षा पर खर्च की वसूली की जाए और संबंधित प्राधिकरण सर्वोच्च न्यायालय के फैसले भारत संघ बनाम. विकास साहा का पालन करें।
मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति अनिल एस. किलोर की पीठ ने कहा,
“याचिकाकर्ता ने अपने बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं दी और न ही सूचना का स्रोत स्पष्ट किया।”
पीठ ने यह भी नोट किया कि याचिका केवल एक समाचार रिपोर्ट के आधार पर दायर की गई प्रतीत होती है, बिना पर्याप्त शोध के।
अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा,
“यह जनहित याचिका प्रेरित (motivated) है और कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है।”
इसी आधार पर अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया।
Case Details
Case Title: Lalan Kishor Singh vs. Union of India & Others
Case Number: Public Interest Litigation No. 31 of 2026
Judges: Chief Justice Shree Chandrashekhar & Justice Anil S. Kilor
Decision Date: 20 April 2026











