दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार (19 मई) को आम आदमी पार्टी (AAP) के कई वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ स्वतः संज्ञान लेते हुए आपराधिक अवमानना कार्यवाही शुरू की। अदालत ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत अन्य नेताओं को नोटिस जारी किया। मामला दिल्ली आबकारी नीति से जुड़े केस की सुनवाई के दौरान एक न्यायाधीश के खिलाफ कथित सोशल मीडिया अभियान से जुड़ा है।
न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रविंदर दुडेजा की खंडपीठ ने सभी नेताओं को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
यह कार्यवाही न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा द्वारा पारित आदेश के बाद शुरू हुई। अदालत ने कहा कि आबकारी नीति मामले की सुनवाई के दौरान सोशल मीडिया पर न्यायालय और न्यायाधीश को निशाना बनाने वाली सामग्री प्रसारित की गई।
नोटिस पाने वालों में केजरीवाल और सिसोदिया के अलावा संजय सिंह, सौरभ भारद्वाज, विनय मिश्रा और दुर्गेश पाठक भी शामिल हैं।
इससे पहले कुछ नेताओं ने न्यायमूर्ति शर्मा से मामले की सुनवाई से खुद को अलग करने की मांग की थी। हालांकि अदालत ने यह मांग ठुकरा दी थी।
अवमानना कार्यवाही शुरू करते हुए न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा कि सोशल मीडिया पर चलाया गया अभियान केवल व्यक्तिगत आलोचना तक सीमित नहीं दिखता, बल्कि इससे न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सार्वजनिक अविश्वास पैदा करने की कोशिश नजर आती है।
अदालत ने यह भी कहा कि न्यायाधीश के भाषणों के संपादित वीडियो और अदालत की कार्यवाही के चुनिंदा हिस्सों को ऑनलाइन प्रसारित किया गया। कोर्ट के मुताबिक, इससे “एक समानांतर नैरेटिव” तैयार करने का प्रयास दिखाई देता है।
अदालत ने आदेश में कहा,
“यह मामला केवल एक न्यायाधीश के खिलाफ टिप्पणी का नहीं, बल्कि न्यायिक संस्था की गरिमा से जुड़ा हुआ है।”
खंडपीठ ने स्वतः संज्ञान अवमानना मामले में सभी प्रस्तावित अवमाननाकारियों को औपचारिक नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का समय दिया।
मामले की अगली सुनवाई जवाब आने के बाद होगी।











