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बुनियादी तथ्य ही नहीं, तो कारण बताओ नोटिस कैसे? सुप्रीम कोर्ट ने ED की कार्रवाई पर लगाई रोक

सुप्रीम कोर्ट ने FEMA मामले में ED की कार्रवाई रद्द कर दी और कहा कि बिना ठोस आधार के जारी SCN और कार्यवाही कानून के खिलाफ है। - जे श्री निशा बनाम प्रवर्तन निदेशालय (ED)

Vivek G.
बुनियादी तथ्य ही नहीं, तो कारण बताओ नोटिस कैसे? सुप्रीम कोर्ट ने ED की कार्रवाई पर लगाई रोक

नई दिल्ली में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) से जुड़े एक अहम विवाद में महत्वपूर्ण निर्णय दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिना पर्याप्त आधार के जारी शो-कॉज नोटिस (SCN) और उस पर आधारित कार्यवाही न्यायसंगत नहीं मानी जा सकती।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला जे श्री निशा बनाम प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जुड़ा है। आरोप था कि अपीलकर्ताओं-जिसमें एक कंपनी और उसके निदेशक शामिल हैं ने सिंगापुर की कंपनी सिल्वर पार्क इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड के शेयर बिना RBI अनुमति के हासिल किए।

ED ने दावा किया कि यह FEMA के प्रावधानों का उल्लंघन है और इसी आधार पर संपत्तियों को जब्त करने की कार्रवाई शुरू की गई। हालांकि, बाद में सक्षम प्राधिकारी (Competent Authority) ने 3 फरवरी 2021 को कहा कि ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं है जिससे यह साबित हो कि वास्तव में कोई विदेशी संपत्ति या निवेश हुआ था।

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अपीलकर्ताओं ने मद्रास हाईकोर्ट में शो-कॉज नोटिस को चुनौती दी, लेकिन:

  • सिंगल जज ने याचिका खारिज कर दी
  • डिवीजन बेंच ने भी इस फैसले को बरकरार रखा

हाईकोर्ट का मानना था कि कारण बताओ नोटिस (SCN) के खिलाफ सीधे हस्तक्षेप उचित नहीं है।

सुनवाई के दौरान पीठ ने मामले के मूल आधार पर सवाल उठाए।

कोर्ट ने कहा:

“यदि सक्षम प्राधिकारी ने यह पाया कि जब्ती के लिए कोई आधार ही नहीं है, तो उसी आधार पर जारी SCN भी संदिग्ध हो जाता है।”

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एक और महत्वपूर्ण टिप्पणी में कोर्ट ने कहा:

“शो-कॉज नोटिस पर हस्तक्षेप सामान्यतः नहीं किया जाता, लेकिन जहां यह अधिकार क्षेत्र के बिना या कानून के दुरुपयोग के रूप में जारी हो, वहां अदालत हस्तक्षेप कर सकती है।”

कोर्ट ने यह भी पाया कि एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी ने हाईकोर्ट की टिप्पणियों पर अत्यधिक निर्भरता दिखाई और अपील लंबित होने के बावजूद सक्षम प्राधिकारी के आदेश को नजरअंदाज कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि:

  • FEMA की धारा 37A के तहत जब्ती एक प्रारंभिक (interim) प्रक्रिया है
  • लेकिन यदि सक्षम प्राधिकारी ही जब्ती को खारिज कर दे, तो यह “reason to believe” की कमी दर्शाता है
  • ऐसे में आगे की कार्यवाही (जैसे SCN) का आधार कमजोर हो जाता है

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सुप्रीम कोर्ट ने:

  • मद्रास हाईकोर्ट के आदेश (23 जुलाई 2024) को रद्द किया
  • सिंगल जज का आदेश भी निरस्त किया
  • ED द्वारा पारित अंतिम आदेश (26 अगस्त 2024) को भी अवैध करार दिया

कोर्ट ने निर्देश दिया कि:

  • पहले अपीलीय प्राधिकरण लंबित अपील का निर्णय करेगा
  • उसके बाद ही SCN से जुड़ी कार्यवाही आगे बढ़ेगी
  • पूरी प्रक्रिया बिना किसी पूर्वाग्रह के होगी

Case Details

Case Title: J. Sri Nisha vs Special Director, Directorate of Enforcement & Anr.

Case Number: Civil Appeal arising out of SLP (C) No. 23415 of 2025 & connected matters

Judges: Justice Vikram Nath & Justice Sandeep Mehta

Decision Date: April 1, 2026

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