दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर चेक बाउंस मामले में अभिनेता राजपाल यादव के खिलाफ सुनवाई पूरी करते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया। सुनवाई के दौरान अदालत ने भुगतान को लेकर उनके बदलते रुख पर कड़ी टिप्पणी की।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत दायर किया गया है, जो चेक बाउंस से जुड़े अपराधों से संबंधित है।
मई 2024 में सत्र अदालत ने राजपाल यादव को दोषी ठहराते हुए छह महीने की सजा सुनाई थी। बाद में हाईकोर्ट ने समझौते के आश्वासन पर सजा को निलंबित कर दिया और मामले को मध्यस्थता केंद्र भेजा।
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इसके बावजूद अदालत ने पाया कि कई अवसर मिलने के बाद भी वादा किया गया भुगतान पूरा नहीं किया गया। करीब ₹7.75 करोड़ की राशि अब भी बकाया बताई गई।
जस्टिस स्वर्णा कांत शर्मा ने सुनवाई के दौरान सख्त रुख अपनाते हुए कहा,
“जज अगर नरम हैं तो इसका मतलब यह नहीं कि वे कमजोर हैं।”
अदालत ने राजपाल यादव और उनके वकीलों के बयानों में विरोधाभास पर सवाल उठाया।
“आप कह रहे हैं कि भुगतान करेंगे, लेकिन आपके वकील कह रहे हैं कि नहीं करेंगे… अगर भुगतान करना है तो कीजिए,” कोर्ट ने कहा।
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वादी पक्ष के वकील ने दलील दी,
“सजा पूरी होने से देनदारी खत्म नहीं होती, भुगतान की जिम्मेदारी बनी रहती है।”
अदालत ने ₹6 करोड़ में एकमुश्त समझौते की संभावना तलाशी, जिस पर वादी पक्ष ने सहमति जताई।
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वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए राजपाल यादव ने कहा,
“अदालत जो भी निर्देश देगी, मैं उसका पालन करूंगा,” हालांकि उन्होंने आर्थिक नुकसान की भी बात कही।
जब राजपाल यादव ने भुगतान के लिए 30 दिन का समय मांगा, तो अदालत ने इसे ठुकरा दिया।
“नहीं मतलब नहीं। मैं फैसला सुरक्षित रख रही हूं,” जस्टिस शर्मा ने कहा।
समझौता नहीं हो पाने के बाद अदालत ने मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
Case Title: M/s Murli Projects Pvt. Ltd. v. Rajpal Yadav










