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SARFAESI ACT | देरी से भुगतान के बावजूद कर्जदार का संपत्ति वापस लेने का अधिकार बना रहता है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पूरा कर्ज चुकाने के बाद उधारकर्ता की संपत्ति नहीं छीनी जा सकती, SARFAESI नीलामी को रद्द कर दिया गया। - ई. मुथुराथिनसाबथी और अन्य बनाम मैसर्स श्री इंटरनेशनल एवं अन्य।

Shivam Y.
SARFAESI ACT | देरी से भुगतान के बावजूद कर्जदार का संपत्ति वापस लेने का अधिकार बना रहता है: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि यदि उधारकर्ता (borrower) पूरा कर्ज चुका देता है, तो उसकी संपत्ति को नीलामी के आधार पर उससे छीना नहीं जा सकता। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून का उद्देश्य केवल बकाया वसूली है, न कि संपत्ति से वंचित करना।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला SARFAESI Act, 2002 के तहत बैंक द्वारा की गई नीलामी से जुड़ा था।
एक फर्म ने ₹4 करोड़ का लोन लिया था, लेकिन समय पर भुगतान न करने पर खाते को NPA घोषित कर दिया गया। इसके बाद बैंक ने गिरवी संपत्तियों की नीलामी प्रक्रिया शुरू की।

सितंबर 2020 में ई-ऑक्शन हुआ, जिसमें खरीदारों ने बोली जीतकर 25% रकम जमा कर दी। हालांकि, विभिन्न न्यायिक आदेशों के कारण नीलामी की पुष्टि (confirmation) लंबे समय तक लंबित रही।

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इस बीच उधारकर्ताओं ने DRT, DRAT और हाईकोर्ट में कई याचिकाएं दायर कीं और धीरे-धीरे पूरी बकाया राशि चुका दी।

सुप्रीम कोर्ट ने पूरे घटनाक्रम को विस्तार से देखते हुए कहा कि:

“जब देरी न्यायिक आदेशों और प्रक्रिया के कारण हुई हो, तो उसका दोष उधारकर्ता पर नहीं डाला जा सकता।”

अदालत ने यह भी कहा कि SARFAESI नियमों के तहत नीलामी की प्रक्रिया तय समयसीमा में पूरी होनी चाहिए। यहाँ खरीदारों ने पूरी राशि बहुत देर से जमा की, जो नियमों के विपरीत था।

“कानूनी प्रक्रिया का उद्देश्य संपत्ति का निष्पक्ष और समयबद्ध निपटान है, न कि किसी पक्ष को अनुचित लाभ देना।”

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कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उधारकर्ता का right of redemption (कर्ज चुकाकर संपत्ति वापस लेने का अधिकार) तब तक बना रहता है, जब तक बिक्री पूरी तरह वैध तरीके से अंतिम रूप न ले ले।

अदालत के सामने मुख्य सवाल थे:

  • क्या नीलामी की पुष्टि और रजिस्ट्री के बाद भी उसे रद्द किया जा सकता है?
  • क्या उधारकर्ता का संपत्ति वापस लेने का अधिकार खत्म हो जाता है?

कोर्ट ने माना कि यदि नीलामी प्रक्रिया ही नियमों के अनुसार पूरी नहीं हुई, तो उसका अंतिम परिणाम भी टिकाऊ नहीं होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए सभी अपीलें खारिज कर दीं।

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अदालत ने आदेश दिया कि:

  • नीलामी और बिक्री प्रमाणपत्र (sale certificate) अमान्य रहेंगे
  • बैंक को संपत्ति वापस उधारकर्ताओं को देनी होगी
  • खरीदारों को उनकी जमा राशि 12% ब्याज के साथ लौटाई जाएगी

अंत में कोर्ट ने कहा कि:

“जब पूरा कर्ज चुका दिया गया हो, तो संपत्ति से वंचित करना न्यायसंगत नहीं है।”

Case Details

Case Title: E. Muthurathinasabathy & Ors. vs M/s Sri International & Ors.

Case Number: Civil Appeal (Arising out of SLP (C) Nos. 8850-8851/2023 & connected matters)

Judges: Justice Dipankar Datta, Justice Satish Chandra Sharma

Decision Date: April 1, 2026

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