मेन्यू
समाचार खोजें...
होमSaved

कलकत्ता हाईकोर्ट में ECI के बड़े ट्रांसफर आदेश को चुनौती, PIL में उठे संवैधानिक सवाल

कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनाव आयोग द्वारा अधिकारियों के बड़े पैमाने पर ट्रांसफर को चुनौती दी गई, जिसमें संवैधानिक अधिकारों और संघीय ढांचे पर सवाल उठे। -

Court Book
कलकत्ता हाईकोर्ट में ECI के बड़े ट्रांसफर आदेश को चुनौती, PIL में उठे संवैधानिक सवाल

कोलकाता हाईकोर्ट में चुनाव के दौरान अधिकारियों के बड़े पैमाने पर तबादले को लेकर एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग (ECI) ने बिना ठोस कारणों के कई वरिष्ठ अधिकारियों का ट्रांसफर किया, जिससे राज्य प्रशासन पर असर पड़ा है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला अर्का कुमार नाग बनाम भारत निर्वाचन आयोग से जुड़ा है, जिसमें याचिकाकर्ता स्वयं एक अधिवक्ता हैं और राज्य सरकार का भी प्रतिनिधित्व करते हैं।

याचिका में बताया गया कि 15 मार्च 2026 को ECI द्वारा चुनाव की घोषणा के तुरंत बाद मुख्य सचिव, गृह सचिव, DGP सहित कई अधिकारियों का स्थानांतरण कर दिया गया।

Read also:- दिल्ली उच्च न्यायालय ने कोविड राहत केंद्र में तैनात स्कूल अधिकारी के परिजनों को 1 करोड़ रुपये की अनुग्रह राशि देने का आदेश दिया।

याचिकाकर्ता के अनुसार,

“इतने बड़े स्तर पर तबादले से राज्य के प्रशासनिक कामकाज पर गंभीर असर पड़ा है।”

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बंद्योपाध्याय ने अदालत में कहा कि:

  • अनुच्छेद 324 ECI को असीमित शक्ति नहीं देता।”
  • “ECI को कानून और संवैधानिक सीमाओं के भीतर ही कार्य करना चाहिए।”

उन्होंने तर्क दिया कि इतने बड़े स्तर पर अधिकारियों का ट्रांसफर संघीय ढांचे में हस्तक्षेप जैसा है।

Read also:- बॉम्बे हाई कोर्ट ने IVF कराने वाली महिलाओं के लिए ART अधिनियम में निर्धारित आयु सीमा को चुनौती देने के मामले में विशेषज्ञों से राय मांगी है।

एक महत्वपूर्ण दलील में कहा गया:

“यह कार्रवाई ऐसी प्रतीत होती है मानो राज्य में आपातकाल जैसी स्थिति बना दी गई हो।”

उन्होंने यह भी बताया कि कुछ अधिकारियों को चुनाव ड्यूटी से हटाने की बात कही गई, लेकिन एक अधिकारी को दूसरे राज्य में ‘ऑब्जर्वर’ बनाकर भेजा गया, जो परस्पर विरोधाभासी है।

राज्य के महाधिवक्ता किशोर दत्ता ने भी याचिकाकर्ता का समर्थन किया।

उन्होंने अदालत में कहा:

“ECI की कार्रवाई राज्य सरकार को ‘निष्क्रिय’ करने जैसी है।”

उन्होंने जोर दिया कि चुनाव आयोग को केवल वही स्टाफ मिलना चाहिए जो राज्य सरकार प्रस्तावित करे, और वह भी कानून के अनुसार।

Read also:- केरल हाईकोर्ट सख्त: मध्यस्थता केंद्रों की खामियों पर सरकार से मांगी रिपोर्ट, ₹11 करोड़ फंड पर भी स्पष्टता

चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डी.एस. नायडू ने आरोपों का खंडन किया।

उन्होंने कहा:

“ECI एक स्वतंत्र और निष्पक्ष संवैधानिक संस्था है, और उस पर लगाए गए आरोप निराधार हैं।”

उन्होंने यह भी तर्क दिया कि याचिकाकर्ता ने अपनी भूमिका पूरी तरह पारदर्शी तरीके से सामने नहीं रखी है।

मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी सेन की पीठ ने सभी पक्षों की दलीलें सुनीं।

अदालत ने इस बात पर विशेष ध्यान दिया कि:

  • क्या ECI की शक्तियाँ अनुच्छेद 324 के तहत सीमित हैं
  • क्या ट्रांसफर आदेश कानून और वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप हैं
  • क्या इस तरह के तबादले राज्य प्रशासन के कामकाज को प्रभावित करते हैं

मामले की सुनवाई 27 मार्च 2026 को पूरी हुई और 31 मार्च 2026 को निर्णय सुरक्षित रखा गया।

Case Details

Case Title: Arka Kumar Nag vs. Election Commission of India & Ors.

Case Number: WPA (P) 141 of 2026

Court: Calcutta High Court

Judges: Chief Justice Sujoy Paul & Justice Partha Sarathi Sen

Decision Date: 31 March 2026

More Stories