मेन्यू
समाचार खोजें...
होमSaved

दिल्ली दंगा केस में पुलिस जांच पर सवाल,दिल्ली उच्च न्यायालय ने रिहाई आदेश बरकरार रखा

दिल्ली दंगा मामले में अदालत ने राज्य की याचिका खारिज करते हुए आरोपियों की रिहाई को बरकरार रखा, जांच और सबूतों पर गंभीर सवाल उठाए। - राज्य (दिल्ली राजधानी) बनाम अजय और अन्य।

Shivam Y.
दिल्ली दंगा केस में पुलिस जांच पर सवाल,दिल्ली उच्च न्यायालय ने रिहाई आदेश बरकरार रखा

दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत में 25 मार्च 2026 को सुनवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण फैसला सामने आया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने राज्य सरकार की पुनरीक्षण याचिका (revision petition) खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोपियों को दी गई राहत को सही ठहराया।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला वर्ष 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़ा है। पुलिस ने आरोप लगाया था कि आरोपी अजय और गौरव पंचाल दंगों में शामिल थे और उन्होंने हिंसा, आगजनी और मारपीट जैसी घटनाओं को अंजाम दिया।

ट्रायल कोर्ट ने पहले ही पर्याप्त सबूत न होने के आधार पर दोनों आरोपियों को आरोपों से मुक्त (discharge) कर दिया था। इसके खिलाफ राज्य ने उच्च अदालत में चुनौती दी।

Read also:- गुरुग्राम POCSO मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त: पुलिस जांच पर उठाए सवाल, SIT गठित

सुनवाई के दौरान अदालत ने जांच और साक्ष्यों पर गंभीर सवाल उठाए।

कोर्ट ने पाया कि:

  • FIR दर्ज करने में देरी हुई और इसका स्पष्ट कारण रिकॉर्ड पर नहीं था
  • घायल व्यक्ति की पहचान और मेडिकल रिकॉर्ड में विरोधाभास थे
  • पुलिस ने CCTV फुटेज या स्वतंत्र गवाह जुटाने की कोशिश नहीं की
  • आरोपियों की पहचान “संयोगवश” थाने में हुई, जिसे अदालत ने संदिग्ध माना

अदालत ने स्पष्ट कहा,

“इन सभी परिस्थितियों को एक साथ देखने पर अभियोजन की कहानी पर भरोसा करना मुश्किल हो जाता है।”

एक और अहम टिप्पणी में अदालत ने कहा कि केवल शक (suspicion) नहीं, बल्कि “गंभीर शक” होना चाहिए, लेकिन इस मामले में संदेह आरोपियों पर नहीं बल्कि पुलिस की कहानी पर है।

Read also:- सुप्रीम कोर्ट ने किरायेदार की बेदखली रोकने की आखिरी कोशिश को खारिज करते हुए ₹5 लाख का जुर्माना भरने का आदेश दिया।

कोर्ट ने यह भी नोट किया कि पुलिस ने वैज्ञानिक और निष्पक्ष तरीके से जांच नहीं की।

“जांच एजेंसी ने तार्किक और वस्तुनिष्ठ तरीकों की बजाय केवल बयान जुटाने पर ज्यादा ध्यान दिया,” अदालत ने कहा।

इसके अलावा, कथित हथियारों की बरामदगी को भी कानूनी रूप से कमजोर माना गया।

सभी तथ्यों और साक्ष्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने कहा कि ट्रायल कोर्ट का फैसला “पूरी तरह सही” है और उसमें कोई कानूनी त्रुटि नहीं है।

अंततः, राज्य की पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी गई और आरोपियों की रिहाई बरकरार रखी गई।

Case Details:

Case Title: State (NCT of Delhi) vs Ajay & Anr.

Case Number: Criminal Revision No. 118/22

Judge: Shri Sameer Bajpai (ASJ-03, Shahdara)

Decision Date: 25 March 2026

Mobile App

Take CourtBook Everywhere

Access your account on the go with our mobile app.

Install App
CourtBook Mobile App

More Stories