सरकारी ठेकों से संबंधित एक महत्वपूर्ण फैसले में, सर्वोच्च न्यायालय ने अनुबंध समाप्ति और ब्लैकलिस्टिंग के बीच स्पष्ट अंतर बताया है। झारखंड में एक ठेकेदार के काम की समाप्ति को बरकरार रखते हुए, न्यायालय ने ब्लैकलिस्टिंग आदेश को कानूनी रूप से त्रुटिपूर्ण और प्रक्रियात्मक रूप से अनुचित बताते हुए रद्द कर दिया।
मामले की पृष्ठभूमि
मामला झारखंड के जल आपूर्ति परियोजना से जुड़ा है, जहां कंपनी को 2023 में एक पानी की टंकी (Elevated Service Reservoir) बनाने का ठेका दिया गया था। निर्माण के दौरान 1 जून 2024 को टंकी का ऊपरी हिस्सा ढह गया।
विभाग ने इसे खराब गुणवत्ता और लापरवाही का परिणाम बताया और 4 जून 2024 को कारण बताओ नोटिस जारी किया। बाद में कई जांच समितियों—जिसमें तकनीकी संस्थान भी शामिल थे ने कंपनी की लापरवाही की पुष्टि की। इसके बाद 23 अगस्त 2024 को विभाग ने ठेका समाप्त कर कंपनी को 5 साल के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया।
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सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि ठेका समाप्त करना और ब्लैकलिस्टिंग दो अलग-अलग कानूनी कार्रवाइयाँ हैं, जिनके लिए अलग-अलग मानदंड लागू होते हैं।
कोर्ट ने कहा,
“ब्लैकलिस्टिंग एक गंभीर दंड है, जो भविष्य के व्यापारिक अवसरों को प्रभावित करता है, इसलिए इसे बिना उचित प्रक्रिया के लागू नहीं किया जा सकता।”
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अदालत ने पाया कि विभाग ने ब्लैकलिस्टिंग से पहले स्पष्ट और विशिष्ट कारण बताओ नोटिस नहीं दिया। नोटिस में यह साफ नहीं था कि कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने का प्रस्ताव है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि:
“प्राकृतिक न्याय का सिद्धांत (audi alteram partem) अनिवार्य है और बिना उचित सुनवाई के ब्लैकलिस्टिंग नहीं की जा सकती।”
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सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतिम फैसले में कहा कि:
- ठेका समाप्त करने का निर्णय सही और वैध है
- कंपनी की लापरवाही के पर्याप्त सबूत मौजूद हैं
- लेकिन ब्लैकलिस्टिंग का आदेश प्रक्रिया में खामियों के कारण अवैध है
अदालत ने ब्लैकलिस्टिंग आदेश को रद्द करते हुए निर्देश दिया कि यह आदेश तुरंत प्रभाव से समाप्त माना जाएगा।
Case Details
Case Title: M/s A.K.G. Construction and Developers Pvt. Ltd. v. State of Jharkhand & Ors.
Case Number: Civil Appeal arising out of SLP (C) No. 23858 of 2025
Judges: Justice Pamidighantam Sri Narasimha & Justice Alok Aradhe
Decision Date: April 2, 2026










