मद्रास हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि किसी सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम (PSU) के कर्मचारियों को राज्य सरकार के कर्मचारियों के बराबर वेतनमान देने के लिए पहले सरकार की मंजूरी जरूरी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि बिना सरकारी स्वीकृति के ऐसा लाभ स्वतः नहीं दिया जा सकता।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला अरासु रबर कॉर्पोरेशन लिमिटेड में कार्यरत एक लाइनमैन वी. शुनमुगम से जुड़ा था। उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार के विभागों में काम करने वाले लाइनमैन को जो वेतनमान मिलता है, वही उन्हें भी मिलना चाहिए।
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उन्होंने अदालत से मांग की कि उनका वेतनमान 1 जून 1988 से ₹610–1075 तय किया जाए और बाद में मिलने वाले लाभ भी दिए जाएं। एकल पीठ ने पहले उनके पक्ष में आदेश दिया था।
अदालत की टिप्पणी
डिवीजन बेंच ने कहा कि अरासु रबर कॉर्पोरेशन एक सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी है, इसलिए उसके कर्मचारियों के वेतन में बदलाव के लिए राज्य सरकार की मंजूरी जरूरी है।
अदालत ने कहा,
“सरकार द्वारा जारी निर्देश निगम के नियमों पर प्रभावी होते हैं और वेतनमान बढ़ाने से पहले सरकारी स्वीकृति लेना अनिवार्य है।”
न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि ‘समान काम के लिए समान वेतन’ का सिद्धांत हर स्थिति में लागू नहीं होता, खासकर तब जब कर्मचारी अलग-अलग संस्थानों में काम कर रहे हों।
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अदालत का निर्णय
अदालत ने पाया कि इस मामले में वेतनमान बढ़ाने के लिए सरकार की मंजूरी नहीं ली गई थी। इसलिए एकल पीठ का आदेश नियमों और सरकारी निर्देशों के विपरीत है।
इसी आधार पर मद्रास हाईकोर्ट ने पहले का आदेश रद्द कर दिया और राज्य सरकार की अपील स्वीकार कर ली।
Case Title: State of Tamil Nadu & Anr. v. V. Shunmugam
Case No.: W.A. No. 1804 of 2023
Decision Date: 23 February 2026










