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सुप्रीम कोर्ट: संपत्ति रजिस्टर में दर्ज प्रविष्टियाँ स्वामित्व साबित नहीं करतीं, MCD's का दावा खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली भूमि विवाद में हाईकोर्ट का फैसला रद्द कर नगर निगम को 60 दिनों में लेआउट प्लान में शामिल करने पर पुनर्विचार का निर्देश दिया। - पवन गर्ग और अन्य बनाम दक्षिण दिल्ली नगर निगम

Rajan Prajapati
सुप्रीम कोर्ट: संपत्ति रजिस्टर में दर्ज प्रविष्टियाँ स्वामित्व साबित नहीं करतीं, MCD's का दावा खारिज

नई दिल्ली में लंबे समय से चल रहे भूमि विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट के डिवीजन बेंच के निर्णय को रद्द करते हुए यह स्पष्ट किया कि मामले में स्वामित्व (टाइटल) का मुद्दा अनावश्यक रूप से उठाया गया था।

मामले की पृष्ठभूमि

यह विवाद ग्रीन पार्क एक्सटेंशन क्षेत्र में स्थित लगभग 1600 वर्ग गज जमीन से जुड़ा है। मूल रूप से यह भूमि एक कॉलोनाइज़र के पास थी, जिसने इसे विकास योजना के तहत नगर निगम को सौंपा था। शुरुआती लेआउट प्लान में इस जमीन को हाई स्कूल के लिए आरक्षित किया गया था, लेकिन बाद में 1969 में संशोधित योजना में यह आरक्षण हटा दिया गया।

इसके बाद जमीन अलग-अलग खरीदारों को बेची गई। वर्ष 1988 में सिविल कोर्ट ने इन खरीदारों के पक्ष में स्थायी निषेधाज्ञा (injunction) दी, जिसमें कहा गया कि नगर निगम बिना कानूनी प्रक्रिया अपनाए कब्जा नहीं ले सकता। यह निर्णय बाद में अंतिम हो गया क्योंकि अपीलें खारिज हो गईं।

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सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर भूमि के स्वामित्व पर टिप्पणी की।

अदालत ने स्पष्ट किया,

“डिवीजन बेंच को केवल यह देखना था कि क्या सिंगल जज द्वारा दिया गया निर्देश सही था या नहीं, न कि टाइटल का विवाद खड़ा करना।”

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी नोट किया कि:

  • जमीन का आरक्षण पहले ही समाप्त हो चुका था।
  • नगर निगम ने कभी भी स्वामित्व का दावा स्पष्ट रूप से किसी मंच पर नहीं उठाया।
  • केवल संपत्ति रजिस्टर में एंट्री होना स्वामित्व का प्रमाण नहीं हो सकता।

अदालत ने यह भी माना कि अपीलकर्ताओं और उनके पूर्वजों का लंबे समय से कब्जा निर्विवाद रहा है।

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सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के डिवीजन बेंच के फैसले को “कानून और तथ्यों दोनों में अस्थिर” बताते हुए रद्द कर दिया।

अदालत ने सिंगल जज के आदेश को बहाल करते हुए निर्देश दिया कि:

  • नगर निगम 60 दिनों के भीतर अपीलकर्ताओं के आवेदन पर विचार करे।
  • प्लॉट को कॉलोनी के लेआउट प्लान में शामिल करने पर एक “स्पीकिंग ऑर्डर” (कारण सहित निर्णय) पारित किया जाए।
  • यह निर्णय किसी पूर्व टिप्पणी से प्रभावित नहीं होगा।

Case Details:

Case Title: Pawan Garg & Ors. v. South Delhi Municipal Corporation

Case Number: Civil Appeal arising out of SLP (C) No. 26487 of 2019

Judges: Justice Vikram Nath and Justice Sandeep Mehta

Decision Date: April 20, 2026

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