इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक अहम सुनवाई के दौरान जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने एस. विग्नेश शिशिर बनाम राहुल गांधी व अन्य मामले की सुनवाई से खुद को अलग (recuse) कर लिया। यह निर्णय याचिकाकर्ता द्वारा सोशल मीडिया पर किए गए पोस्ट के बाद आया।
मामले की पृष्ठभूमि
यह याचिका BNSS की धारा 528 के तहत दाखिल की गई थी, जिसमें धारा 173(4) के तहत आगे की जांच से जुड़े आदेश को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता स्वयं कोर्ट में पेश हुए थे।
16 और 17 अप्रैल 2026 को हुई सुनवाई में याचिकाकर्ता और अन्य पक्षों के वकीलों ने यह दलील दी कि प्रस्तावित आरोपी को नोटिस देना आवश्यक नहीं है। इसी आधार पर अदालत ने 17 अप्रैल को खुली अदालत में आदेश भी डिक्टेट कर दिया था।
हालांकि, आदेश पर हस्ताक्षर करने से पहले अदालत के सामने एक फुल बेंच का निर्णय आया, जिसमें कहा गया था कि ऐसे मामलों में संभावित आरोपी को सुनवाई का अवसर देना जरूरी होता है। इसके बाद कोर्ट ने मामले को दोबारा सुनने का फैसला किया।
जस्टिस विद्यार्थी ने अपने आदेश में कहा कि पहले जो कानूनी स्थिति कोर्ट के सामने रखी गई थी, वह सही प्रतीत नहीं होती।
कोर्ट ने कहा,
“पक्षकारों को इस मुद्दे पर अदालत के समक्ष अपनी बात रखने का अवसर दिया जाना आवश्यक है।”
अदालत ने यह भी माना कि धारा 528 BNSS के तहत दायर याचिका, प्रकृति में एक तरह की पुनरीक्षण (revision) कार्यवाही जैसी है, जिसमें प्रभावित पक्ष को सुना जाना जरूरी होता है।
सुनवाई के बाद याचिकाकर्ता ने सोशल मीडिया पर कई पोस्ट किए, जिनमें उन्होंने “बैकडोर गतिविधियों” और बाहरी प्रभाव की बात कही।
अदालत ने इन पोस्ट को गंभीरता से लेते हुए कहा कि इससे न्यायालय पर सवाल उठाए गए हैं।
“ये संदेश संकेत देते हैं कि याचिकाकर्ता ने इस न्यायालय पर आरोप लगाए हैं,” अदालत ने टिप्पणी की।
हालांकि, कोर्ट ने यह भी नोट किया कि बाद में याचिकाकर्ता ने अदालत पर विश्वास जताया और जनता से राय भी मांगी कि क्या उन्हें इसी कोर्ट में आगे बढ़ना चाहिए।
कोर्ट ने इस बात पर भी चिंता जताई कि सुनवाई के दौरान सही कानूनी स्थिति प्रस्तुत नहीं की गई।
सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि वकीलों का कर्तव्य है कि वे कोर्ट को सही और निष्पक्ष कानूनी सहायता दें।
“उचित सहायता का अभाव न्याय के त्वरित निष्पादन में बाधा बनता है,” अदालत ने कहा।
इन परिस्थितियों को देखते हुए जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया।
कोर्ट ने कहा,
“इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए, मैं इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग करना उचित समझता हूं।”
मामले को अब मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखा जाएगा, जो इसे किसी अन्य पीठ को सौंपेंगे।
Case Details:
Case Title: S. Vignesh Shishir vs Rahul Gandhi & Others
Case Number: Application U/S 528 BNSS No. 673 of 2026
Judge: Justice Subhash Vidyarthi
Decision Date: April 20, 2026










