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पुलिसकर्मी को कार से टक्कर मारकर बोनट पर घसीटने के आरोप में आरोपी को जमानत नहीं: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट

मुनेंद्र सिंह बनाम मध्य प्रदेश राज्य - मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने ग्वालियर मामले में आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी, जिसमें एनएसजी के मॉक ड्रिल के दौरान एक पुलिस कांस्टेबल को कथित तौर पर पीटा गया और कार के बोनट पर घसीटा गया था।

Shivam Y.
पुलिसकर्मी को कार से टक्कर मारकर बोनट पर घसीटने के आरोप में आरोपी को जमानत नहीं: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर पीठ ने एक ऐसे मामले में जमानत देने से इनकार कर दिया, जिसमें आरोप है कि ट्रैफिक जांच के दौरान एक पुलिसकर्मी को कार से टक्कर मारकर कुछ दूरी तक बोनट पर घसीटा गया। अदालत ने कहा कि आरोप गंभीर हैं और प्रथम दृष्टया यह घटना सरकारी कर्मचारी को उसके कर्तव्य से रोकने की एक संगठित कोशिश दिखाती है।

यह आदेश न्यायमूर्ति मिलिंद रमेश फडके की एकल पीठ ने मुनेन्द्र सिंह बनाम मध्यप्रदेश राज्य मामले में 23 फरवरी 2026 को पारित किया।

मामले की पृष्ठभूमि

प्रकरण के अनुसार, 4 फरवरी 2026 की रात ग्वालियर के डीबी मॉल के सामने एनएसजी की मॉक ड्रिल चल रही थी। वहां पुलिसकर्मी ट्रैफिक व्यवस्था संभालने के लिए तैनात थे।

इसी दौरान एक सफेद होंडा अमेज कार तेज और लापरवाही से आती हुई दिखाई दी। पुलिसकर्मियों ने वाहन को रोकने के लिए संकेत दिया और सड़क पर स्टॉपर भी रखा।

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अभियोजन के मुताबिक, चालक ने चेकिंग से बचने के लिए गाड़ी की रफ्तार बढ़ा दी और ड्यूटी पर तैनात कॉन्स्टेबल रवि कुमार विमल को टक्कर मार दी। इसके बाद कथित तौर पर वाहन में बैठे लोगों ने उन्हें पकड़कर कार के बोनट पर गिरा दिया और लगभग 30–40 मीटर तक घसीटा, जिससे उन्हें सिर और पैर में चोटें आईं।

बाद में पुलिस ने वाहन को रोककर चालक सहित तीन लोगों को पकड़ लिया। चालक की पहचान अंकित गुर्जर के रूप में हुई, जबकि अन्य दो लोगों में मुनेन्द्र भदौरिया और सोहिल खान शामिल बताए गए। इसी घटना के आधार पर विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया गया।

आरोपी मुनेन्द्र सिंह की ओर से अदालत में कहा गया कि वह सिर्फ कार में बैठा यात्री था और वाहन नहीं चला रहा था। बचाव पक्ष का कहना था कि लापरवाही से गाड़ी चलाने का आरोप चालक पर है और आवेदक के खिलाफ कोई स्पष्ट भूमिका नहीं बताई गई है।

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वकील ने यह भी दलील दी कि जांच लगभग पूरी हो चुकी है, वाहन जब्त किया जा चुका है और आरोपी 5 फरवरी 2026 से जेल में है। इसलिए आगे हिरासत में रखने की आवश्यकता नहीं है।

साथ ही, सुप्रीम कोर्ट के Satender Kumar Antil बनाम CBI फैसले का हवाला देते हुए कहा गया कि अनावश्यक गिरफ्तारी और लंबे समय तक जेल में रखने से बचना चाहिए।

राज्य की ओर से लोक अभियोजक ने जमानत का कड़ा विरोध किया। उनका कहना था कि यह साधारण सड़क दुर्घटना नहीं बल्कि ड्यूटी कर रहे पुलिसकर्मी पर हमला है।

अभियोजन ने तर्क दिया कि वाहन में बैठे सभी लोगों ने मिलकर पुलिसकर्मी को रोकने से बचने और सरकारी काम में बाधा डालने की कोशिश की।

राज्य ने अदालत से कहा कि यदि आरोपी को इस चरण में जमानत दी गई तो वह गवाहों को प्रभावित कर सकता है और जांच प्रभावित हो सकती है।

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अदालत ने रिकॉर्ड और दलीलों पर विचार करते हुए कहा कि आरोप गंभीर हैं और घटना के हालात बताते हैं कि पुलिसकर्मी पर हमला हुआ जब वह सरकारी कर्तव्य निभा रहा था।

पीठ ने कहा,

“घटना का तरीका यह संकेत देता है कि वाहन में बैठे लोगों ने मिलकर एक सार्वजनिक सेवक को उसके आधिकारिक कर्तव्य के निर्वहन से रोकने की कोशिश की।”

सुप्रीम कोर्ट के सतेंद्र कुमार एंटिल फैसले का हवाला देते हुए दी गई दलील पर भी अदालत ने कहा कि उस निर्णय की परिस्थितियां अलग थीं और वह हर मामले में स्वतः जमानत देने का आधार नहीं बन सकता।

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अधिवक्ता के आचरण पर न्यायालय की चिंता

सुनवाई के दौरान अदालत ने आवेदक के वकील के आचरण पर भी गंभीर टिप्पणी की। कोर्ट ने उल्लेख किया कि संबंधित अधिवक्ता को पहले आपराधिक अवमानना का दोषी ठहराया जा चुका है और जब तक वह अवमानना को विधिवत समाप्त नहीं करते, तब तक उनके अदालत में पेश होने पर नियमों के तहत प्रश्न उठता है।

कोर्ट ने रजिस्ट्रार कार्यालय को निर्देश दिया कि अधिवक्ता से यह पूछते हुए शो-कॉज नोटिस जारी किया जाए कि वे किस अधिकार से अदालत में पेश हो रहे हैं। साथ ही राज्य बार काउंसिल से भी इस मामले में उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी गई।

सभी तथ्यों और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि इस चरण पर आरोपी को जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता।

अदालत ने स्पष्ट शब्दों में आदेश दिया कि मुनेन्द्र सिंह की जमानत याचिका खारिज की जाती है।

Case Title: Munendra Singh v. State of Madhya Pradesh

Case Number: Miscellaneous Criminal Case (MCRC) No. 7860 of 2026

Date of Order: 23 February 2026

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