बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि केवल WhatsApp चैट और संदेशों के आधार पर क्रूरता (Cruelty) साबित कर तलाक का आदेश नहीं दिया जा सकता, खासकर तब जब दूसरी पक्ष को सबूतों का जवाब देने का अवसर ही न दिया गया हो। अदालत ने नासिक फैमिली कोर्ट द्वारा दिया गया एकतरफा तलाक का आदेश रद्द करते हुए मामले को दोबारा सुनवाई के लिए वापस भेज दिया।
यह आदेश न्यायमूर्ति भारती डांगरे और मंजुषा देशपांडे की खंडपीठ ने 27 फरवरी 2026 को पारित किया।
मामले की पृष्ठभूमि
यह अपील पत्नी द्वारा दायर की गई थी, जिसमें उन्होंने नासिक फैमिली कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें पति को हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13(1)(i-a) के तहत क्रूरता के आधार पर तलाक दे दिया गया था।
फैमिली कोर्ट ने 27 मई 2025 को पारित अपने आदेश में कहा था कि पति की गवाही को WhatsApp चैट और SMS संदेशों से समर्थन मिलता है। अदालत ने माना था कि पत्नी पति पर पुणे स्थानांतरित होने का दबाव बना रही थी और ससुराल वालों के लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल कर रही थी।
इन संदेशों को मानसिक क्रूरता का आधार मानते हुए फैमिली कोर्ट ने पति के पक्ष में तलाक की डिक्री जारी कर दी थी।
हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद पाया कि फैमिली कोर्ट ने केवल WhatsApp चैट पर भरोसा करके तलाक का आदेश दिया, जबकि पत्नी को इन आरोपों का जवाब देने और सबूतों को चुनौती देने का मौका ही नहीं दिया गया।
पीठ ने कहा कि इस तरह के मामलों में साक्ष्यों को विधिवत प्रस्तुत और परखा जाना जरूरी है।
अदालत ने कहा,
“सिर्फ WhatsApp चैट पर निर्भर रहकर तलाक की डिक्री नहीं दी जा सकती, क्योंकि इसे साक्ष्य के रूप में विधिवत साबित नहीं किया गया।”
पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी पक्ष को साक्ष्य का खंडन करने का अवसर नहीं दिया गया, तो उस आधार पर दिया गया फैसला न्यायसंगत नहीं माना जा सकता।
इन परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने नासिक फैमिली कोर्ट के 27 मई 2025 के तलाक आदेश को रद्द कर दिया।
अदालत ने मामले को दोबारा सुनवाई के लिए फैमिली कोर्ट को वापस भेजते हुए कहा कि दोनों पक्षों को अपने-अपने साक्ष्य पेश करने और उनका परीक्षण कराने का पूरा अवसर दिया जाए।
साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि यदि पक्षकार चाहें तो इस दौरान मध्यस्थता (Mediation) के माध्यम से समझौते की संभावना भी तलाश सकते हैं।
इसके साथ ही फैमिली कोर्ट अपील और उससे संबंधित अंतरिम आवेदन का निपटारा कर दिया गया।
Case Title: Supriya Gaurav Devare v. Gaurav Jitendra Patil
Case Number: Family Court Appeal No. 70 of 2025
Date of Decision: 27 February 2026
Advocates:
- For the Appellant: Shubham S. Sane
- For the Respondent: Sanjay P. Shinde with Prathmesh T. Bhanuwanshe









