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सोशल मीडिया पोस्ट और टेंडर गड़बड़ी पर केरल हाईकोर्ट सख्त, 3 हफ्ते में रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश

केरल हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया पोस्ट हटाने का आदेश देते हुए डिजिटल सर्वे प्रोजेक्ट के टेंडर में कथित गड़बड़ियों पर सरकार से जवाब मांगा। - शाजी जे. कोडानकंडाथ बनाम केरल राज्य और अन्य

Shivam Y.
सोशल मीडिया पोस्ट और टेंडर गड़बड़ी पर केरल हाईकोर्ट सख्त, 3 हफ्ते में रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश

केरल उच्च न्यायालय ने एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर सख्त रुख अपनाया और साथ ही एक बड़े सरकारी प्रोजेक्ट में कथित अनियमितताओं पर जवाब मांगा है। अदालत ने माफी स्वीकार करते हुए भी आगे की कार्रवाई जारी रखी।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला W.P. (PIL) No. 37 of 2026 में सामने आया, जहां याचिकाकर्ता ने डिजिटल सर्वे प्रोजेक्ट से जुड़े टेंडर प्रक्रिया में गंभीर खामियों का मुद्दा उठाया। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता और एक समाचार पत्र के संपादक ने अपने प्रकाशनों के लिए माफी मांगी, जिसे अदालत ने रिकॉर्ड पर लेते हुए स्वीकार कर लिया।

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हालांकि, राज्य की ओर से यह बताया गया कि विवादित पोस्ट अब भी फेसबुक और इंस्टाग्राम पर उपलब्ध हैं।

मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन और न्यायमूर्ति श्याम कुमार वी.एम. की पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि सोशल मीडिया पोस्ट अब भी मौजूद हैं, तो उन्हें तुरंत हटाया जाए और किसी भी स्थिति में 24 घंटे के भीतर हटा दिया जाना चाहिए।

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अदालत ने कहा,

“यदि ऐसे पोस्ट उपलब्ध रहते हैं, तो उन्हें तुरंत हटाया जाना आवश्यक है।”

साथ ही, अदालत ने जांच रिपोर्ट में सामने आई खामियों पर भी गंभीर चिंता जताई।

जांच रिपोर्ट के अनुसार:

  • टेंडर में चयन के बाद उपकरणों की कीमतों में कई गुना वृद्धि हुई
  • खरीदे गए उपकरण जल्दी खराब हो गए
  • टेंडर प्रक्रिया में स्पष्ट कमियां थीं

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अदालत ने नोट किया कि इन तथ्यों के बावजूद, आगे की कार्रवाई का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं है।

इन परिस्थितियों में अदालत ने राजस्व विभाग के प्रधान सचिव को निर्देश दिया कि वे 3 सप्ताह के भीतर एक शपथपत्र दाखिल कर यह स्पष्ट करें कि जांच रिपोर्ट की सिफारिशों पर क्या कार्रवाई की गई।

साथ ही, याचिकाकर्ता को भी जवाबी हलफनामा दाखिल करने की अनुमति दी गई।

मामले की अगली सुनवाई 21 मई 2026 को निर्धारित की गई।

Case Title: Shaji J. Kodankandath vs State of Kerala & Others

Case Number: W.P. (PIL) No. 37 of 2026

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