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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने विजयपुर उपचुनाव चुनौती खारिज की, आपराधिक मामलों के खुलासे पर याचिका नहीं मानी

रामनिवास रावत बनाम मुकेश मल्होत्रा ​​और अन्य, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने विजयपुर विधानसभा उपचुनाव को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की, उम्मीदवार के आपराधिक मामलों के खुलासे पर अदालत की अहम टिप्पणी।

Vivek G.
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने विजयपुर उपचुनाव चुनौती खारिज की, आपराधिक मामलों के खुलासे पर याचिका नहीं मानी

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर पीठ ने विजयपुर विधानसभा सीट के उपचुनाव को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा कि याचिका में लगाए गए आरोप और प्रस्तुत तथ्यों के आधार पर चुनाव परिणाम को निरस्त करने का आधार नहीं बनता।

यह फैसला न्यायमूर्ति जी.एस. अहलुवालिया ने सुनाया। मामला उस उपचुनाव से जुड़ा था जिसमें कांग्रेस उम्मीदवार मुकेश मल्होत्रा को विजयी घोषित किया गया था।

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मामले की पृष्ठभूमि

रिकॉर्ड के अनुसार, याचिकाकर्ता रामनिवास रावत पहले विजयपुर सीट से विधायक रह चुके थे। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में वे कांग्रेस के टिकट पर चुने गए थे। बाद में उन्होंने इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी जॉइन कर ली, जिसके कारण सीट खाली हो गई और निर्वाचन आयोग ने उपचुनाव घोषित किया।

इस उपचुनाव में रामनिवास रावत भाजपा उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरे, जबकि मुकेश मल्होत्रा कांग्रेस के प्रत्याशी थे। मतदान 12 नवंबर 2024 को हुआ और मतगणना 23 नवंबर 2024 को हुई, जिसमें मुकेश मल्होत्रा विजयी घोषित हुए।

याचिका में लगाए गए आरोप

चुनाव याचिका में मुख्य आरोप यह लगाया गया कि मुकेश मल्होत्रा ने अपने नामांकन के साथ दाखिल हलफनामे (फॉर्म-26) में आपराधिक मामलों की पूरी जानकारी नहीं दी।

याचिकाकर्ता का दावा था कि उनके खिलाफ कुल छह आपराधिक मामले दर्ज थे, लेकिन उन्होंने केवल दो मामलों का अधूरा विवरण दिया। आरोप यह भी था कि कुछ मामलों में आरोप तय हो चुके थे, फिर भी हलफनामे में यह जानकारी नहीं दी गई।

इसके अलावा, याचिका में कहा गया कि कुछ पुराने मामलों-जिनमें वन अधिनियम से जुड़ा मामला और आईपीसी के तहत दर्ज मामले शामिल थे-का भी उल्लेख हलफनामे में नहीं किया गया। याचिकाकर्ता के अनुसार, इस तरह की जानकारी छिपाना मतदाताओं से महत्वपूर्ण तथ्य छिपाने जैसा है और इसे भ्रष्ट आचरण माना जाना चाहिए।

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अदालत में पक्षकारों की दलीलें

याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि उम्मीदवारों के लिए आपराधिक मामलों की जानकारी देना अनिवार्य है, ताकि मतदाता सही निर्णय ले सकें। उनका तर्क था कि जानकारी छिपाने से चुनाव परिणाम प्रभावित हो सकता है।

दूसरी ओर, विजयी उम्मीदवार की ओर से दलील दी गई कि कानून के अनुसार केवल वही मामले अनिवार्य रूप से बताने होते हैं जिनमें आरोप तय हो चुके हों या जिनमें एक वर्ष से अधिक की सजा हुई हो। ऐसे में जिन मामलों में सजा एक वर्ष से कम थी या जिनकी प्रकृति अलग थी, उन्हें न बताना कानून का उल्लंघन नहीं है।

यह भी कहा गया कि याचिका में यह स्पष्ट रूप से नहीं बताया गया कि कथित जानकारी छिपाने से चुनाव परिणाम किस प्रकार “मौलिक रूप से प्रभावित” हुआ।

अदालत की टिप्पणियां

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने चुनाव याचिका से जुड़े कानूनी प्रावधानों और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि चुनाव परिणाम को रद्द करने के लिए केवल आरोप पर्याप्त नहीं होते, बल्कि यह भी दिखाना होता है कि कथित गड़बड़ी से चुनाव परिणाम वास्तव में प्रभावित हुआ।

पीठ ने यह भी माना कि चुनाव याचिकाओं में आवश्यक तथ्यों और स्पष्ट आरोपों का होना जरूरी है। यदि याचिका में जरूरी तथ्य और कानूनी आधार स्पष्ट नहीं हैं, तो अदालत उसे स्वीकार नहीं कर सकती।

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कोर्ट का फैसला

मामले के सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने विजयपुर विधानसभा उपचुनाव को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका को खारिज कर दिया।

अदालत ने माना कि याचिकाकर्ता की ओर से लगाए गए आरोप चुनाव परिणाम को रद्द करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। इसके साथ ही अदालत ने विजयी उम्मीदवार मुकेश मल्होत्रा के चुनाव को वैध माना।

Case Title: Ramniwas Rawat v. Mukesh Malhotra & Others

Case No.: Election Petition No. 24 of 2024

Decision Date: 09 March 2026

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