इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि प्रतियोगी परीक्षा में शामिल किसी उम्मीदवार को अन्य उम्मीदवारों की उत्तर पुस्तिकाओं की फोटोकॉपी पाने का अधिकार नहीं है। अदालत ने माना कि ऐसे मामलों में उम्मीदवारों को केवल अंक संबंधी जानकारी देना पर्याप्त हो सकता है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला रेलवे के डीज़ल लोकोमोटिव वर्क्स, वाराणसी में लीगल असिस्टेंट पद की भर्ती परीक्षा से जुड़ा था। परीक्षा में शामिल उम्मीदवार संतोष कुमार ने आरटीआई के तहत अपने और दो अन्य उम्मीदवारों के अंक तथा उनकी उत्तर पुस्तिकाओं की फोटोकॉपी मांगी थी।
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सूचना अधिकारी ने प्रश्नपत्र उपलब्ध करा दिया, लेकिन उत्तर पुस्तिकाओं की प्रतियां देने से इनकार कर दिया और केवल निरीक्षण की अनुमति दी। इसके बाद केंद्रीय सूचना आयोग ने आदेश दिया कि उत्तर पुस्तिकाओं की फोटोकॉपी दी जाए।
अदालत की टिप्पणी
हाईकोर्ट की पीठ ने कहा कि किसी उम्मीदवार के अंक साझा करना गोपनीय निजी जानकारी नहीं माना जा सकता, क्योंकि चयन प्रक्रिया में अंततः मेरिट सूची सार्वजनिक होती है।
पीठ ने कहा, “जब कोई उम्मीदवार स्वयं उसी परीक्षा में शामिल हो, तो अन्य उम्मीदवारों के अंक जानना निजता का उल्लंघन नहीं माना जा सकता।”
हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उत्तर पुस्तिकाओं की फोटोकॉपी देना अलग मामला है, क्योंकि उनमें परीक्षकों के हस्ताक्षर और मूल्यांकन से जुड़ी संवेदनशील जानकारी हो सकती है।
अदालत का निर्णय
अदालत ने कहा कि यदि उम्मीदवार को आवश्यक जानकारी-जैसे अंक-मिल चुके हैं और उत्तर पुस्तिका का निरीक्षण करने की अनुमति भी है, तो फोटोकॉपी देना अनिवार्य नहीं है।
इसी आधार पर हाईकोर्ट ने केंद्रीय सूचना आयोग के उन आदेशों को रद्द कर दिया जिनमें उत्तर पुस्तिकाओं की फोटोकॉपी देने का निर्देश दिया गया था।
Case Title: Union of India Through G.M. Diesel Locomotive Works vs Central Information Commission & Others
Case No.: Writ-C No. 39694 of 2009
Decision Date: 26 February 2026










