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नमाज़ियों की संख्या सीमित क्यों? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी प्रशासन से मांगा जवाब

मुनाज़िर खान बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और 4 अन्य - इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने संभल में रमज़ान की नमाज़ को सीमित करने के लिए यूपी अधिकारियों से सवाल किया, कहा कि राज्य को कानून व्यवस्था बनाए रखनी चाहिए और शांतिपूर्ण पूजा सुनिश्चित करनी चाहिए।

Shivam Y.
नमाज़ियों की संख्या सीमित क्यों? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी प्रशासन से मांगा जवाब

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रमज़ान के दौरान नमाज़ पढ़ने पर लगाई गई संख्या सीमा को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार से कड़े सवाल पूछे। अदालत ने साफ कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना राज्य की जिम्मेदारी है और इस आधार पर इबादत करने वालों की संख्या सीमित करना उचित नहीं है।

यह टिप्पणी जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने एक याचिका की सुनवाई के दौरान की।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला मुनाज़िर खान बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि संभल जिले के गाटा संख्या 291 पर स्थित एक मस्जिद में रमज़ान के दौरान नमाज़ अदा करने से उन्हें रोका जा रहा है।

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याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत से कहा कि स्थानीय प्रशासन ने वहां केवल 20 लोगों को नमाज़ पढ़ने की अनुमति दी है, जबकि रमज़ान के दौरान इससे अधिक लोग इबादत के लिए आ सकते हैं।

दूसरी ओर राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि राजस्व अभिलेखों में इस भूमि का स्वामित्व मोहन सिंह और भूरेज सिंह के नाम दर्ज है। प्रशासन ने संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए लोगों की संख्या सीमित करने का निर्णय लिया।

सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार के इस तर्क पर कड़ी आपत्ति जताई।

पीठ ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है और यदि अधिकारी इस जिम्मेदारी को निभाने में असमर्थ महसूस करते हैं तो उन्हें अपने पद पर बने रहने पर विचार करना चाहिए।

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अदालत ने टिप्पणी की:

“यदि पुलिस अधीक्षक या जिलाधिकारी को लगता है कि वे कानून-व्यवस्था बनाए नहीं रख सकते, तो उन्हें पद से इस्तीफा दे देना चाहिए या स्थानांतरण मांग लेना चाहिए।”

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई धार्मिक अनुष्ठान निजी संपत्ति पर आयोजित किया जा रहा है, तो इसके लिए राज्य से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होती।

पीठ ने कहा कि राज्य की भूमिका तभी आती है जब धार्मिक कार्यक्रम सार्वजनिक भूमि पर आयोजित हो या सार्वजनिक स्थानों तक फैलने की संभावना हो।

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सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत से निर्देश लेने के लिए समय मांगा। वहीं याचिकाकर्ता ने कहा कि वह एक पूरक हलफनामा दाखिल करेंगे जिसमें उस स्थान की तस्वीरें और राजस्व रिकॉर्ड प्रस्तुत किए जाएंगे जहां नमाज़ अदा की जानी है।

इन परिस्थितियों में अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च 2026 को तय की और इसे शीर्ष दस मामलों में सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।

Case Title: Munazir Khan vs State of U.P. and 4 Others

Case Number: Writ - C No. 5996 of 2026

Date of Order: 27 February 2026

Counsels

  • Counsel for Petitioner: Wahaj Ahmad Siddiqui
  • Counsel for Respondent (State): C.S.C. (Chief Standing Counsel)

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