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राजस्थान हाई कोर्ट ने कहा-भरण-पोषण मामले में पत्नी की आय का खुलासा करना अनिवार्य; रिकॉर्ड तलब करने का आदेश

राजस्थान हाई कोर्ट ने भरण-पोषण केस में पत्नी की आय छिपाने के आरोप पर अस्पताल से नौकरी और वेतन रिकॉर्ड मंगाने का आदेश दिया। - अरविंद कुमार बनाम श्रीमती नमिता

Shivam Y.
राजस्थान हाई कोर्ट ने कहा-भरण-पोषण मामले में पत्नी की आय का खुलासा करना अनिवार्य; रिकॉर्ड तलब करने का आदेश

राजस्थान हाई कोर्ट, जोधपुर ने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा कि भरण-पोषण (maintenance) से जुड़े मामलों में पक्षकारों की आय का खुलासा निष्पक्ष निर्णय के लिए आवश्यक है। अदालत ने ट्रायल कोर्ट द्वारा खारिज किए गए आवेदन को रद्द करते हुए निजी अस्पताल से पत्नी की नौकरी और वेतन संबंधी रिकॉर्ड मंगाने का निर्देश दिया।

मामले की पृष्ठभूमि

यह याचिका S.B. Criminal Misc. याचिका संख्या 1527/2026 में दायर की गई थी, जिसमें याचिकाकर्ता पति अरविंद कुमार ने फैमिली कोर्ट के 5 फरवरी 2026 के आदेश को चुनौती दी थी। फैमिली कोर्ट ने उनके उस आवेदन को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने पत्नी की नौकरी और आय से संबंधित दस्तावेज मंगाने की मांग की थी।

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पति का दावा था कि उनकी पत्नी नमिता एक निजी अस्पताल व्यास मेडिसिटी एंड सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, जोधपुर-में नर्स के रूप में कार्यरत हैं और लगभग 80,000 रुपये प्रति माह कमा रही हैं। उनका कहना था कि यह जानकारी पत्नी ने अदालत से छिपाई है।

याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि उन्होंने अस्पताल से जानकारी लेने की कोशिश की, लेकिन निजी संस्था होने के कारण अस्पताल ने बिना सहमति के कोई जानकारी देने से इनकार कर दिया।

उन्होंने कहा,

“यदि दस्तावेज पहले से हमारे पास होते, तो हमें अदालत का दरवाजा खटखटाने की जरूरत ही नहीं पड़ती।”

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पत्नी की ओर से पेश वकील ने आवेदन का विरोध किया और कहा कि इसे अंतिम बहस के चरण में दायर किया गया था, इसलिए ट्रायल कोर्ट का निर्णय सही था। हालांकि, उन्होंने पत्नी की नौकरी के बारे में स्पष्ट रूप से न तो स्वीकार किया और न ही इनकार किया।

न्यायमूर्ति बलजिंदर सिंह संधू ने कहा कि धारा 94 BNSS के तहत अदालत को यह अधिकार है कि वह आवश्यक और उचित दस्तावेज मंगवा सके, यदि वे मामले के निष्पक्ष निर्णय के लिए जरूरी हों।

अदालत ने कहा,

“भरण-पोषण के मामलों में दोनों पक्षों के लिए अपनी आय, संपत्ति और देनदारियों का पूर्ण और ईमानदार खुलासा करना अनिवार्य है।”

सुप्रीम कोर्ट के रजनेश बनाम नेहा फैसले का हवाला देते हुए कोर्ट ने दोहराया कि आय से जुड़ी जानकारी न्यायिक निर्णय का महत्वपूर्ण आधार होती है।

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अदालत ने माना कि:

  • पत्नी की आय का विवरण मामले के निर्णय पर सीधा असर डालता है
  • याचिकाकर्ता ने जानकारी जुटाने के लिए उचित प्रयास किए
  • निजी अस्पताल द्वारा जानकारी देने से इनकार करने के कारण अदालत की सहायता आवश्यक हो गई

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रायल कोर्ट का यह कहना कि दस्तावेज लाने की जिम्मेदारी याचिकाकर्ता की है, उचित नहीं था।

हाई कोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द कर दिया।

अदालत ने निर्देश दिया कि ट्रायल कोर्ट व्यास मेडिसिटी एंड सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, जोधपुर से संबंधित दस्तावेज मंगवाए, जिनमें प्रतिवादी की नौकरी और वेतन की जानकारी शामिल हो।

Case Details

Case Title: Arvind Kumar vs. Smt. Namita

Case Number: S.B. Criminal Misc. Petition No. 1527/2026

Judge: Justice Baljinder Singh Sandhu

Decision Date: 6 April 2026

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