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फिल्म निवेश विवाद में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: ‘धोखाधड़ी नहीं, केवल सिविल मामला’, आपराधिक केस रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि फिल्म में निवेश की विफलता धोखाधड़ी नहीं बल्कि एक दीवानी विवाद है, और फिल्म निर्माता वी. गणेशन के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी है। - वी. गणेशन बनाम राज्य प्रतिनिधि, पुलिस उप निरीक्षक और अन्य।

Vivek G.
फिल्म निवेश विवाद में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: ‘धोखाधड़ी नहीं, केवल सिविल मामला’, आपराधिक केस रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि हर असफल निवेश या वादाखिलाफी को आपराधिक धोखाधड़ी नहीं माना जा सकता। फिल्म निर्माण से जुड़े एक निवेश विवाद में अदालत ने कहा कि मामले में शुरुआत से धोखाधड़ी का इरादा साबित नहीं होता, इसलिए आपराधिक कार्यवाही जारी रखना कानून का दुरुपयोग होगा।

यह फैसला जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा की पीठ ने 19 मार्च 2026 को सुनाया।

मामले की पृष्ठभूमि

अभियोजन के अनुसार, आरोपी ने एक फिल्म बनाने के लिए शिकायतकर्ता से निवेश लिया। शुरुआत में 30% मुनाफे का आश्वासन दिया गया, बाद में अतिरिक्त निवेश पर 47% तक लाभ का वादा किया गया।

हालांकि, फिल्म बनने के बाद अपेक्षित मुनाफा नहीं हुआ। इसके बाद आरोपी ने मूल रकम लौटाने के लिए दो पोस्ट-डेटेड चेक जारी किए, जो बाद में बाउंस हो गए।

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शिकायतकर्ता ने इसे धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात (भारतीय दंड संहिताकी धारा 406 और 420) का मामला बताया।

मद्रास हाईकोर्ट ने धारा 406 (आपराधिक विश्वासघात) को खारिज कर दिया, लेकिन धारा 420 (धोखाधड़ी) के तहत कार्यवाही जारी रखने की अनुमति दी।

हाईकोर्ट का मानना था कि निवेशक को लगातार आश्वासन देकर पैसा दिलवाया गया, जिससे prima facie धोखाधड़ी का मामला बनता है।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गहराई से जांच करते हुए कहा कि:

“धोखाधड़ी साबित करने के लिए यह दिखाना जरूरी है कि आरोपी का इरादा शुरू से ही बेईमानी का था।”

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल वादा पूरा न कर पाने से यह नहीं माना जा सकता कि शुरुआत से ही धोखा देने का इरादा था।

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फिल्म उद्योग के जोखिम को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने कहा:

“फिल्म निर्माण एक उच्च जोखिम वाला व्यवसाय है। निवेशक लाभ के साथ-साथ नुकसान का जोखिम भी स्वीकार करता है।”

अदालत ने कहा कि पोस्ट-डेटेड चेक का बाउंस होना अपने आप में धोखाधड़ी साबित नहीं करता।

“ऐसे चेक भविष्य की देनदारी चुकाने के लिए होते हैं, न कि निवेश के लिए प्रलोभन देने के लिए।”

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सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि:

  • फिल्म वास्तव में बनाई और रिलीज़ की गई
  • निवेश मुनाफे के साझा समझौते पर आधारित था
  • मुनाफा न होना, धोखाधड़ी का प्रमाण नहीं है
  • शुरुआत में बेईमानी का इरादा साबित नहीं हुआ

कोर्ट ने कहा कि यह विवाद मूलतः सिविल प्रकृति का है, न कि आपराधिक।

सुप्रीम कोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट के आदेश को आंशिक रूप से रद्द कर दिया।

धारा 420 IPC के तहत चल रही आपराधिक कार्यवाही को भी पूरी तरह से रद्द कर दिया गया।

Case Details

Case Title: V. Ganesan vs State Rep. by Sub Inspector of Police & Anr.

Case Number: Criminal Appeal No. 1470 of 2026

Judge: Justice Manoj Misra & Justice Pamidighantam Sri Narasimha

Decision Date: March 19, 2026

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