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सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु में पारिवारिक झगड़े में हुई हत्या के मामले में सजा कम की, अश्लीलता का आरोप हटा दिया गया

सुप्रीम कोर्ट ने जमीन विवाद से जुड़े हत्या मामले में एक आरोपी को बरी किया और दूसरे की सजा कम कर दी, घटना को अचानक झगड़े का परिणाम माना। - शिवकुमार बनाम राज्य प्रतिनिधि, पुलिस निरीक्षक द्वारा और सेंथिल @ जानकीराम बनाम राज्य प्रतिनिधि, पुलिस निरीक्षक द्वारा

Vivek G.
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु में पारिवारिक झगड़े में हुई हत्या के मामले में सजा कम की, अश्लीलता का आरोप हटा दिया गया

नई दिल्ली में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक पारिवारिक जमीन विवाद से जुड़े आपराधिक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। अदालत ने पाया कि घटना अचानक हुए विवाद का परिणाम थी, न कि पूर्व नियोजित हमला। इसी आधार पर एक आरोपी को बड़ी राहत दी गई, जबकि दूसरे की सजा कम कर दी गई।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला वर्ष 2014 का है, जहां एक ही परिवार के सदस्यों के बीच जमीन की सीमा को लेकर विवाद था। मृतक और आरोपी आपस में रिश्तेदार और पड़ोसी थे।

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घटना के दिन मृतक अपनी जमीन पर घेराबंदी कर रहा था, जिसका आरोपियों ने विरोध किया। इसी दौरान कहासुनी बढ़ी और मामला हिंसा में बदल गया।

अभियोजन के अनुसार, एक आरोपी ने पहले हमला किया, जबकि दूसरे आरोपी ने लकड़ी के लट्ठ से मृतक के सिर पर वार किया, जिससे उसकी बाद में मृत्यु हो गई।

सुप्रीम कोर्ट ने पूरे घटनाक्रम का विश्लेषण करते हुए कहा:

“घटना पूर्व नियोजित नहीं थी, बल्कि अचानक हुए विवाद और गुस्से में हुई प्रतीत होती है।”

अदालत ने यह भी पाया कि:

  • दोनों पक्षों के बीच पहले से जमीन को लेकर विवाद था
  • हथियार मौके पर ही उपलब्ध थे
  • मृतक को केवल एक गंभीर चोट लगी थी

धारा 294(b) IPC पर कोर्ट ने कहा:

“केवल ‘बास्टर्ड’ जैसे शब्द का प्रयोग अपने आप में अश्लीलता नहीं माना जा सकता।”

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आरोपियों पर निष्कर्ष

पहले आरोपी (A-1) के संबंध में अदालत ने कहा कि उसने मृतक को नहीं, बल्कि गवाह को चोट पहुंचाई थी।

अदालत ने कहा:

“यह साबित नहीं होता कि A-1 ने दूसरे आरोपी के साथ मिलकर मृत्यु कारित करने का साझा इरादा बनाया था।”

इस आधार पर:

दूसरे आरोपी (A-2) के मामले में अदालत ने कहा:

“सिर पर किया गया वार यह दर्शाता है कि आरोपी को अपने कृत्य के परिणाम का ज्ञान था।”

इसलिए A-2 की दोषसिद्धि धारा 304 Part II IPC के तहत बरकरार रखी गई।

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अंतिम फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया:

  • धारा 294(b) IPC के तहत दोनों आरोपियों की सजा रद्द की जाती है
  • A-1 की सजा को पहले से काटी गई अवधि तक सीमित किया जाता है
  • A-2 की सजा 5 वर्ष से घटाकर 3 वर्ष कर दी जाती है

अदालत ने निर्देश दिया कि A-2 संबंधित अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण कर शेष सजा पूरी करे।

Case Details

Case Title: Sivakumar vs State & Senthil @ Janakiram vs State

Case Number: Criminal Appeal No. 1807 of 2019 & 677 of 2020

Judge: Justice Manoj Misra (with Justice P.S. Narasimha)

Decision Date: April 6, 2026

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